लंदन (अभिषेक त्रिपाठी)। अपने आखिरी टेस्ट में शतक लगाकर क्रिकेट की दुनिया से विदा लेने वाले एलिस्टेयर कुक का इंतजार एक ऐसा व्यक्ति कर रहा है जिसने कभी एक मैच भी नहीं खेला, लेकिन वह सरे काउंटी का आधिकारिक क्रिकेटर है। जी हां, हम बात कर रहे हैं ओवल मैदान के पूर्व पिच क्यूरेटर और वर्तमान में ओवल स्थिति क्रिकेट म्यूजियम की देखरेख करने वाले बिली गोर्डन की।

73 वर्षीय बिली गोर्डन ने मंगलवार को हंसते हुए कहा कि मैं कुक का इंतजार कर रहा हूं कि वह अपने से जुड़ी कोई यादगार चीज मुझे देंगे जो इस म्यूजियम की शोभा बढ़ाएगी। आने वाली पीढि़यां उसे यहां आकर देखेंगी। उन्होंने मजाक में कहा कि अगर कुक ने मुझे कुछ नहीं दिया तो मैं उन्हें यहां बंद कर दूंगा। हालांकि वह इस मैच से जुड़ी कुछ ना कुछ चीज मुझे जरूर देंगे। मुझे पता है, वह बहुत शालीन क्रिकेटर हैं।

जब उनसे हमारे सहयोगी प्रकाशन दैनिक जागरण ने पूछा कि आप बिना खेले प्रथम श्रेणी क्रिकेटर कैसे बने? आपको सरे काउंटी की आधिकारिक कैप कैसे मिली, तो उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन यह सच है। मैं इस समय में भले ही इस म्यूजियम के इतिहास को संभालने का काम कर रहा हूं, लेकिन इससे पहले मैंने ओवल स्टेडियम में ही 49 साल मैदानकर्मी और पांच साल स्कोर बोर्ड ऑपरेटर के तौर पर काम किया है। इसमें आठ साल मैं मैदानकर्मियों का मुखिया रहा। मुझे मैदान में समय बिताना हमेशा अच्छा लगता है, लेकिन अब इस उम्र में मेरे लिए ज्यादा चलना-फिरना, मशीनें इधर से उधर करना संभव नहीं। यही कारण है कि अब मैं म्यूजियम की देखरेख करता हूं। मेरा पहला प्यार तो पिच और मैदान की देखरेख करना ही है।

इस मैदान और सरे काउंटी के लिए मेरी लगन और सेवा को देखते हुए वर्ष 2013 में सरे काउंटी के चेयरमैन रिचर्ड थॉमसन ने मुझे आधिकारिक कैप सौंपी। मैं इकलौता ऐसा व्यक्ति हूं जिसने सरे की तरफ से बिना मैच खेले यह आधिकारिक कैप हासिल की है। मैं अब सरे का पूर्व क्रिकेटर हूं।

मालूम हो कि सरे इंग्लैंड की प्रतिष्ठित काउंटी टीम है। इस सीरीज के पहले भारत के कप्तान विराट कोहली ने भी सरे के साथ करार किया था। हालांकि, अनफिट होने के कारण वह सरे के लिए काउंटी मुकाबले नहीं खेल पाए थे। बिली ने कहा कि सरे काउंटी और ओवल स्टेडियम ऐतिहासिक है। ओवल स्टेडियम 1845 में बना और सरे ने 1846 में पहला प्रथम श्रेणी मैच खेला। आपको मालूम ही होगा कि इंग्लैंड में 18 काउंटी टीमें हैं जो यहां आपस में घरेलू क्रिकेट खेलती हैं जैसे भारत में रणजी मुकाबले खेले जाते हैं। सरे ने 19 बार काउंटी चैंपियनशिप जीती है, जो एक मिसाल है। सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, फुटबॉल का पहला एफए कप फाइनल भी ओवल के इसी मैदान में ही खेला गया था। उन्होंने कहा कि 1964 की बात है। तब मैं 19 साल का था तो मैंने सरे के लिए स्कोर बोर्ड ऑपरेटर के तौर नौकरी हासिल की। मुझे क्रिकेट से प्यार था और इस कारण मैंने यहां नौकरी की। इसके बाद मैं मैदानकर्मी बन गया और करियर के आखिरी पड़ाव में इनका मुखिया बना।

बिली जितना ओवल की पिच के बारे में जानकारी रखते हैं उतना ही उन्हें म्यूजियम के बारे में ज्ञान है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में इस मैदान में इंग्लैंड टीम का एशेज ट्रॉफी जीतना मेरे लिए सबसे खुशी का पल रहा। मैंने पिच को इतना रोल किया कि वह पिच बिलकुल पाटा हो गई। केविन पीटरसन ने 158 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच ड्रॉ हो गया और हमने 2-1 से सीरीज जीत ली। सारा देश खुशी मना रहा था। उन्होंने कहा कि यह पिच बाकी पिचों से अलग है। यहां तेज गेंदबाजों को बाउंस भी मिलती है और स्पिनरों को मदद भी मिलती है। ऐसा पूरे इंग्लैंड में नहीं होता। यह हमेशा से ऐसी ही है। भारी मिट्टी, पानी, घास, और बहुत सारी मेहनत से यह पिच बनती है।

उन्होंने ओवल म्यूजियम के बारे में कहा कि यहां पर दुनिया का सबसे पुराना क्रिकेट बैट मौजूद है। 1729 का बना बल्ला यहां रखा हुआ है। क्रिकेट की बाइबल कही जाने वाली विजडन की अब तक छपी हुई हर कॉपी यहां पर है। कुमार संगकारा, माइकल क्लार्क, रिकी पोंटिंग की कई ऐतिहासिक निशानियां यहां पर हैं। किसी ने इस म्यूजियम को दस्ताने दिए तो किसी ने बल्ले तो किसी ने ट्रेनिंग किट। उन्होंने बताया कि बॉडी लाइन सीरीज जीतने वाली इंग्लिश टीम के कप्तान डगलस जॉर्डिन के हस्ताक्षर वाली गेंद भी यहां रखी हुई है। जॉर्डिन भारत के मुंबई में पैदा हुए थे और सरे के लिए खेलते थे। उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ओवल स्टेडियम को सेना ने टेकओवर कर लिया था। हालांकि यहां पर कोई भी बंदी नहीं रखा गया।