मल्टीमीडिया डेस्क। भारत और अफगानिस्तान के बीच गुरुवार से बेंगलुरु में ऐतिहासिक टेस्ट मैच खेला जाएगा। अफगानी टीम इस मैच के ‍जरिए टेस्ट डेब्यू करेगी और टेस्ट क्रिकेट खेलने वाली 12वीं टीम बन जाएगी। यह चौथा मौका होगा जब कोई देश भारत के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करेगा। वैसे तो अनुभव और टीम की ताकत को देखते हुए मैच में भारत का पलड़ा भारी रहने की उम्मीद है, लेकिन टीम इंडिया को एक अफगानी स्पिनर से बचकर रहना होगा।

हम यहां बात कर रहे हैं 19 वर्षीय अफगानिस्तानी स्पिनर राशिद खान की। राशिद का भले ही यह पहला टेस्ट मैच होगा, लेकिन मात्र 3 वर्ष के अंतरराष्ट्रीय अनुभव में वे सीमित ओवरों में दुनिया के शीर्ष गेंदबाज बन चुके हैं। इस गेंदबाज को फर्स्ट क्लास मैचों का भी ज्यादा अनुभव नहीं है, लेकिन लाल गेंद से खेले इन चार प्रथम श्रेणी मैचों में वो 15.05 की औसत से 35 विकेट झटक चुका है। वनडे और टी20 क्रिकेट में विकेट लेने में महारत रखने वाला यह गेंदबाज भी बेंगलुरु में भारत के खिलाफ यादगार शुरुआत करने को बेताब होगा।

माना कि टेस्ट फॉर्मेट क्रिकेट के सीमित ओवरों के फॉर्मेट से एकदम जुदा है, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों को इस गेंदबाज से बचकर रहना होगा। उन्हें शुरू में राशिद को संयमपूर्वक संभलकर खेलना होगा और विकेट नहीं देने होंगे। क्योंकि यदि राशिद को इस मैच में शुरू में ही विकेट मिल गए तो वे दोगुने जोश से भारतीय बल्लेबाजी क्रम में सेंध लगाने का प्रयास करेंगे।

राशिद अभी तक 44 अंतरराष्ट्रीय वनडे मैचों में 100 विकेट ले चुके हैं। वे सबसे तेजी से और सबसे कम उम्र में इस विशेष मंजिल तक पहुंचे थे। वे इसके अलावा 33 टी20 मैचों में 57 विकेट अपने नाम दर्ज कर चुके हैं। वे डेब्यू के बाद ससबे कम अवधि में 50 विकेटों तक पहुंचे थे। राशिद ने हाल ही में संपन्न आईपीएल में दुनिया के दिग्गज बल्लेबाजों को अपनी गेंदों पर नचाया था। उन्होंने इसके बाद बांग्लादेश सीरीज में कहर बरपाते हुए अपनी टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी।

टीम इंडिया को इस मैच में विराट कोहली की कमी खलेगी, लेकिन भारत के पास पर्याप्त मात्रा में स्थापित बल्लेबाज मौजूद है। इसके बावजूद उन्हें ठोस रणनीति के साथ खेलते हुए राशिद का संभलकर सामना करना होगा। राशिद एक आक्रामक गेंदबाज है और यदि उन्हें शुरू में विकेट नहीं मिले तो वे भी बैचेन होंगे और उनकी लाइन लेंथ बिगड़ेगी। मेजबान टीम ने यदि राशिद का सही ढंग से सामना कर लिया तो उनका काम आसान हो जाएगा क्योंकि मुजीबुर रहमान तो अभी युवा है और उन्हें प्रथम श्रेणी मैचों का अनुभव भी नहीं है।