इंदौर। आवेश खान के रणजी करियर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (24 रन देकर 7 विकेट) की बदौलत मध्यप्रदेश ने हैदराबाद को सिर्फ 124 रनों पर समेट दिया। रणजी ट्रॉफी एलीट समूह-बी के इस मैच के पहले ही दिन मप्र ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली। पहले दिन का खेल समाप्त होने तक मप्र ने पहली पारी में एक विकेट पर 168 रन बनाए और 44 रनों की बढ़त हासिल कर ली। स्टम्प्स के समय अजय रोहरा (नाबाद 81) के साथ रजत पाटीदार (नाबाद 51) क्रीज पर मौजूद थे।

होलकर स्टेडियम में मप्र की पहली पारी में आर्यमान बिड़ला और अजय ने पहले विकेट के लिए 68 रनों की भागीदारी की। आर्यमान को तनय थयागराजन ने बोल्ड करते हुए इस साझेदारी को तोड़ा। फिर अजय और रजत ने 100 रनों की भागीदारी कर मप्र को बढ़त दिलाई।

इससे पहले मप्र ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी। होलकर स्टेडियम के विकेट ने परंपरागत अंदाज में शुरुआत में तेज गेंदबाजों को मदद दी और आवेश ने इसका सबसे ज्यादा फायदा उठाया। आवेश ने 4 साल के रणजी करियर में पहली बार पारी में 7 विकेट लिए। इससे पहले उन्होंने पिछले साल अंडर-23 टीम की ओर से एक बार यह कारनामा किया था। तब राजकोट में सौराष्ट्र के खिलाफ पहली पारी में यह उपलब्धि पाई थी। उनका कोई भी शिकार दोहरी रन संख्या तक नहीं पहुंचा।

हैदराबाद ने एक समय 37 रनों पर 7 विकेट गंवा दिए थे और लग रहा था कि टीम 50 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। ऐसे में हिमालय अग्रवाल (नाबाद 69) ने एक छोर थामते हुए टीम को मुश्किल हालात से उबारा। हालांकि हैदराबाद के बल्लेबाजों को तीन जीवनदान भी मिले। गौरव यादव ने हिमालय को कैच आउट कराया जबकि मो. मुदस्सर को बोल्ड किया। मगर दोनों ही बार गेंद नोबॉल निकली। ऐसा ही कुछ कुलदीप सेन के साथ हुआ, जब उन्होंने अक्षत रेड्डी को बोल्ड किया, लेकिन गेंद नोबॉल थी।

सही लाइन-लैंथ से गेंदबाजी करना था लक्ष्य

शुरु में विकेट में नमी थी और हमने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी। हमें मदद मिल रही थी। मैंने यह तो नहीं सोचा था कि 7 विकेट लूंगा, लेकिन सही लाइन-लैंथ से गेंदबाजी करते हुए विकेट लेने के इरादे से मैदान में उतरा था। शुरु में अन्य गेंदबाजों ने विकेट ले लिए थे इसलिए मेरे पास सभी 10 विकेट लेने का विकल्प बचा नहीं था- आवेश खान, तेज गेंदबाज, मप्र रणजी टीम