मल्टीमीडिया डेस्क। क्रिकेट में स्लेजिंग को अच्छा नहीं ‍माना जाता है और इसे खराब आदत के रूप में देखा जाता है। इन दिनों आईसीसी क्रिकेट मैदान में व्यवहार को लेकर बहुत ज्यादा सजग भी हो गया है और इसे नियंत्रण में रख रहा है। स्लेजिंग का प्रयोग आमतौर पर विपक्षी टीम के खिलाड़ी के मनोबल को गिराने के लिए किया जाता है, लेकिन कई बार इसका इस्तेमाल खुद की टीम के लिए ही घातक भी साबित हो जाता है।

इस बात को पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ से अच्छी तरह से कौन जान सकता है। स्टीव वैसे स्वभाव से बहुत ज्यादा आक्रामक नहीं थे, लेकिन 2001 के भारत दौरे पर कोलकाता टेस्ट मैच में उन्होंने राहुल द्रविड़ की स्लेजिंग की और इसके बाद तो भारतीय टीम ने इतिहास रच दिया। भारत ने न केवल ऑस्ट्रेलियाई टीम के लगातार 16 टेस्ट जीत के सिलसिले को रोका, वरन टेस्ट क्रिकेट इतिहास में पिछड़ने के बाद अविश्वसनीय वापसी कर जीत दर्ज कर की।

ऑस्ट्रेलिया पहला टेस्ट जीत चुका था और दूसरे टेस्ट में भी उसने भारत को फॉलोऑन के लिए मजबूर कर दिया था। कंगारू टीम के पहली पारी के 445 रनों के जवाब में भारत की पहली पारी 171 रनों पर सिमट गई थी। 274 रनों से पिछड़ने के बाद फॉलोऑन में खेलते हुए भारत ने दूसरी पारी में 232 रनों पर चौथा विकेट कप्तान सौरव गांगुली के रूप में गंवाया। द्रविड़ खराब दौर से गुजर रहे थे और उन्हें डिमोशन कर तीसरे क्रम की बजाए छठे क्रम पर भेजा गया। कंगारू टीम को जीत नजर आ रही थी और इसी जोश में कप्तान स्टीव वॉ ने द्रविड़ पर ताना कसा। उन्होंने कहा, राहुल तीसरे की बजाए छठे क्रम पर उतरे। अब अगले मैच में क्या ये 12वें नंबर पर दिखेंगे।

द्रविड़ ने इस आलोचना को सकारात्मक रूप में लिया और इससे प्रेरित होकर बेहतर प्रदर्शन करने की ठानी। उनके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं था, इसलिए उन्होंने पूरा ध्यान इस पारी पर केंद्रित किया, दूसरे छोर पर उनके साथ वीवीएस लक्ष्मण थे, जो शानदार बल्लेबाजी कर रहे थे।

भारत ने मैच के चौथे दिन 254/4 से आगे खेलना शुरू किया, इस वक्त लक्ष्मण 109 और द्रविड़ 7 रन बनाकर क्रीज पर थे। इस वक्त भारत मेहमान टीम की बढ़त से 22 रन पीछे था और उसके 4 विकेट खो चुके थे। सभी को लग रहा था मैच ज्यादा से ज्यादा दूसरे सत्र में खत्म हो जाएगा, लेकिन लक्ष्मण और द्रविड़ के इरादे कुछ और ही थे। दिन का खेल खत्म होने तक ये दोनों स्कोर को बिना किसी और नुकसान के 589 तक ले जा चुके थे। ठीक 17 साल पहले 14 मार्च का ही वह दिन था जब द्रविड़ और लक्ष्मण ने दिनभर में 335 रन जोड़ते हुए अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

यह साझेदारी अंतिम दिन उस वक्त टूटी जब लक्ष्मण 281 रन बनाकर मॅक्ग्राथ के शिकार बने। लक्ष्मण और द्रविड़ पांचवें विकेट के लिए 376 रनों की भागीदारी कर अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा चुके थे। इसके बाद द्रविड़ 180 रन बनाकर आउट हुए। भारत ने दूसरी पारी 8 विकेट पर 657 रन बनाकर घोषित की और इस तरह उसने कंगारू टीम के सामने 384 रनों का लक्ष्य रखा।

अब तक स्टीव वॉ को समझ आ चुका था कि द्रविड़ की स्लेजिंग करना उन्हें कितना महंगा पड़ा। इसके बाद हरभजन सिंह (73/6) और सचिन तेंडुलकर (31/3) के फिरकी के जाल में कंगारू बल्लेबाज उलझे और भारत ने मेहमानों की दूसरी पारी को 212 रनों पर समेट दिया। इस तरह भारत ने यह मुकाबला 171 रनों से अपने नाम कर टेस्ट क्रिेकेट इतिहास में यादगार जीत दर्ज की।