नई दिल्ली। लंबे वक्त बाद राष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करने वाला बिहार अब नए विवाद में पड़ गया है। राज्य क्रिकेट संघ ने विजय हजारे ट्रॉफी के लिए चुनी गई अंडर-23 टीम में ऐसे खिलाड़ी को चुना है, जो पहले चयनकर्ता रह चुका है।

इस खिलाड़ी का नाम आशीष सिन्हा है। 28 वर्षीय आशीष पटना सेंट्रल के विधायक अरुण कुमार सिन्हा के बेटे हैं और उन्होंने 2010 में झारखंड की तरफ से राजस्थान के खिलाफ एक रणजी मैच खेला था। इस मैच में आशीष ने दोनों पारियों में 16 और 12 रन बनाए थे।

आशीष को जून में अंडर-23 राज्य टीम ट्रायल्स के लिए चयनकर्ता नियुक्त किया गया था। इन ट्रायल्स का आयोजन बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) ने किया था। असल में इस साल आठ जून को आशीष ने कटिहार, अररिया, भागलपुर, किशनगंज, पूर्णिया, बांका और जमुई जिलों के लिए हुई अंडर-23 प्रतियोगिता के लिए क्षेत्रीय चयनकर्ता के रूप में भूमिका निभाई थी।

इस मामले को लेकर जब आशीष से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने अंडर-23 चयनकर्ता की भूमिका निभाई है। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि अब वह विजय हजारे ट्रॉफी में खेलने के लिए तैयार हैं। आशीष से कहा, "हां, मुझे चयनकर्ता बनाया गया था, लेकिन अब मैं इस पद से हट गया हूं। मैं संक्षिप्त समय के लिए चयनकर्ता रहा और इसके लिए कोई आधिकारिक पत्र भी जारी नहीं किया गया था। मैं बीसीए के आग्रह पर चयनकर्ता बना था।"

आशीष से पूछा गया कि आरोप लगाए जा रहे हैं कि अपने पिता के प्रभाव के कारण उन्हें राज्य की सीनियर टीम में चुना गया, तो उन्होंने कहा, "मैं आपको बता दूं कि जब मैं झारखंड के लिए रणजी ट्रॉफी में खेला था तब भी मेरे पिता विधायक थे, इसलिए यह कैसे मायने रखता है। मैं अब भी क्लब क्रिकेट में सक्रिय हूं। बिहार की घरेलू क्रिकेट में वापसी हुई है और मैं सीनियर टीम के लिए खेलना चाहता हूं। हमें खिलाड़ियों की आलोचना करने के बजाय इस पर गर्व करना चाहिए कि बिहार एक बार फिर से रणजी ट्रॉफी में खेलेगा।"

बीसीए के अध्यक्ष गोपाल बोहरा ने भी आशीष के चयन का बचाव किया। बोहरा ने कहा, "यह अस्थाई चयन समिति थी और आशीष उसका हिस्सा था। वह अच्छा क्रिकेटर है। जब हम 18 साल बाद वापसी कर रहे हैं, तो हमें कप्तान प्रज्ञान ओझा के अलावा कुछ अनुभवी खिलाड़ियों की जरूरत है।"