नई दिल्ली। रेलवे ने खेलकूद प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पदक पाने वाले अपने खिलाड़ी कर्मचारियों को अफसर के रूप में प्रमोशन देने की नई नीति के तहत भारतीय महिला कुश्ती टीम के मुख्य प्रशिक्षक कुलदीप सिंह को असिस्टेंट कमर्शियल मैनेजर के पद पर प्रमोट करने का निर्णय लिया है। उनके अलावा ग्वांग्जू एशियाड की स्टीपल चेज में स्वर्ण पदक जीतने वाली सुधा सिंह को भी अफसर ग्रेड में प्रमोट किया गया है।

उत्तर रेलवे में तैनात कुलदीप सिंह रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता महिला पहलवान साक्षी मलिक तथा राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता पहलवान विनेश फोगट के कोच हैं। ये दोनो भी रेलवे की कर्मचारी हैं।

इसके अलावा दो बार ओलंपिक में हिस्सा ले चुकी तथा जकार्ता एशियाई खेलों की रजत और ग्वांग्जू एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता (स्टीपल चेज) सुधा सिंह को भी नई नीति के तहत अफसर ग्रेड में प्रमोशन दिया गया। रायबरेली की रहने वाली सुधा सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार से खेल विभाग में नियुक्ति का अनुरोध किया था। रेलवे की पिछली सख्त प्रमोशन नीति के कारण रेलवे के कई खिलाड़ी नाराज होकर नौकरी छोड़ चुके हैं। इनमें ओलंपिक कांस्य पदक विजेता विजेंदर सिंह भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेताओं को सम्मानित करते हुए रेलमंत्री पीयूष गोयल ने खिलाडियों तथा प्रशिक्षकों के लिए एक समग्र प्रमोशन नीति लाए जाने का ऐलान किया था। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि जो खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक जीतते हैं उन्हें विशिष्ट सम्मान मिलना चाहिए। उसी के बाद रेलवे खेलकूद संवर्धन बोर्ड ने खिलाडियों और कोच की प्रमोशन देने की उदार नीति तैयार की है। जिसके अनुसार जिन खिलाडियों ने राष्ट्रमंडल अथवा एशियाई खेलों में पदक जीतने के साथ कम से कम दो बार ओलंपिक में भाग लिया हो, अथवा अर्जुन पुरस्कार या राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार प्राप्त किया हो, उन्हें बारी से पहले तरक्की दी जाएगी।

इसी प्रकार खिलाडियों को प्रशिक्षण देने वाले कोच के लिए भी प्रमोशन के कुछ नए मानक तय किए गए हैं। जिसके अनुसार पद्म पुरस्कार प्राप्त करने वाले कोच के अलावा ऐसे कोच को भी बारी से पहले प्रमोशन मिलेगा जिनके शिष्यों में से किसी ने ओलंपिक, एशियाई अथवा राष्ट्रमंडल खेलों में किसी में कोई पदक जीता हो।