नई दिल्ली। इंटरनेट पर किसी भी तरह की एक्टिविटी शत प्रतिशत सुरक्षित हो... इसका दावा तो अब गूगल भी नहीं कर सकता। जी हां यह बिलकुल सही है। आपका मेल हो या किसी अन्य प्रकार का डेटा उसके पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा कोई कंपनी नहीं कर सकती। ऑनलाइन डेटा चोरों ने अब गूगल कैलेंडर यूजर्स के स्मार्टफोन को टारगेट करना शुरू कर दिया है। लेकिन, घबरानी की जरूरत नहीं है क्योंकि, कुछ जरूरी एहतियात बरतने से आप अपने डेटा सुरक्षित रख सकते हैं। साइबर सिक्यूरिटी फर्म कैस्पर्स्की ने बताया है कि, साइबर अपराधियों ने यूजर्स के प्राइवेट डेटा में सेंध लगाने के लिए फिशिंग स्कैम का नया तरीका ढूंढ़ लिया है। ये अब गूगल कैलेंडर के नए यूजर्स को अपना शिकार बना रहे हैं।

ई-मेल भेज करते हैं डेटा चोरी

गूगल कैलेंडर यूज करने वाला कोई भी यूजर आपके साथ मीटिंग शेड्यूल कर सकता है। मीटिंग सेट करने के साथ ही आपके जीमेल अकाउंट में एक ई-मेल नोटिफिकेशन आता है। हैकर्स इसी ई-मेल के जरिए हैकिंग को अंजाम दे रहे हैं। इस स्कैम में हैकर यूजर्स को कैलेंडर मीटिंग इन्विटेशन भेजते हैं। ई-मेल में मीटिंग रिक्वेस्ट के साथ ही एक मलीशस लिंक भी मौजूद रहता है। इस लिंक पर क्लिक करते ही यूजर्स को किसी दूसरी वेबसाइट पर डायरेक्ट कर दिया जाता है जहां से हैकर यूजर्स के लॉगइन की जानकारी चुरा लेते हैं। कैस्पर्स्की के अनुसार, हैकर जीमेल के स्पैम फिल्टर को बाइपास करने की पूरी कोशिश करते हैं। स्पैम फिल्टर के बाइपास होने के बाद उनके द्वारा भेजे गए ई-मेल सीधे यूजर के इनबॉक्स में पहुंचते हैं। ऐसा होते ही गूगल सर्विस यूजर को इनबॉक्स में आए ई-मेल का नोटिफिकेशन देती है। इनबॉक्स में आए इन ई-मेल को खुद गूगल के ऐंटीस्पैम मॉड्यूल डिटेक्ट नहीं कर पाते और हैकर्स का काम आसान हो जाता है।

इस तरह आप डेटा सिक्योर कर सकते हैं

आमतौर पर ऐसे स्कैम को पहचानना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन सावधान रहने से इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। अगली बार जब भी आपको किसी अनजान गूगल कैलेंडर इन्विटेशन मिले तो आप उसे डिलीट कर दें। साथ ही इस बात का जरूर ध्यान रखें कि आपको उस ई-मेल में दिए गए किसी भी लिंक पर क्लिक नहीं करना है। इसके अलावा अगर आपने किसी चीज के लिए रजिस्टर किया है तो उस वेबपेज पर जाने के लिए हमेशा नए टैब का इस्तेमाल करें।

क्या है शिपिंग स्कैम

इन्टरनेट पर धोखाधड़ी का वह तरीका जिसमें एक जाली वेबपेज आदि के माध्यम से यूज़र्स से उसकी व्यक्तिगत व गोपनीय सूचनाएं आदि ले ली जाती हैं व उनसे अवैध लाभ प्राप्त किया जाता है। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार यह एक नए तरीके का स्कैम है जिसमें हैकर्स अब यूजर के पासवर्ड और लॉगइन की डीटेल को जान जाते हैं।