बीजिंग। भारत द्वारा हुआवे टेक्नोलॉजीज और जेडटीई कॉर्प को 5-जी परीक्षण से बाहर कर देने पर चीन बौखला गया है। उसने अपनी कंपनियों के लिए बराबरी का मौका मुहैया कराने की मांग भारत से की है। पिछले दिनों चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में इस संबंध में एक खबर छपी थी।

उसमें कहा गया था कि हुआवे और जेडटीई भारत में 5-जी परीक्षण में हिस्सा नहीं ले सकतीं। इसकी वजह यह है कि भारत के दूरसंचार विभाग ने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों का हवाला देकर दोनों कंपनियों को 5-जी परीक्षण से बाहर कर दिया है।

अखबार के मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) और ऑस्ट्रेलिया में भी दोनों कंपनियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से ही इसी तरह का प्रतिबंध लगाया गया है। भारत ने भी यही देखते हुए दोनों कंपनियों को 5-जी परीक्षण के लिए स्थानीय कंपनियों के साथ मिलकर काम करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों की सूची से बाहर किया है।

हालांकि दूरसंचार विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विभाग एक समिति गठित करने की प्रक्रिया में है। यह समिति इसका निर्णय लेगी कि किन क्षेत्रों में 5-जी का उपयोग हो सकता है।

दूरसंचार विभाग की सचिव अरुणा सुंदरराजन ने पिछले सप्ताह शुक्रवार को कहा था कि कंपनियों की तरफ से 5-जी के उपयोग के लिए जो मामले सामने लाए गए हैं, वे बेहद प्राथमिक स्तर के हैं। हम एक कोर ग्रुप के गठन की प्रक्रिया में हैं, जो उन कंपनियों के साथ मिलकर यह तय करेगा कि हमें किन क्षेत्रों में 5-जी की जरूरत है।

गौरतलब है कि विभाग ने 5-जी समिति के सदस्य और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर आरोग्यस्वामी जे पॉलराज की सलाह पर एरिक्सन, नोकिया, सैमसंग, सिस्को और एनईसी को 5-जी परीक्षण के लिए आमंत्रित किया था।