वाशिंगटन। सोशल नेटवर्किंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी फेसबुक की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। अमेरिका में संघीय जांचकर्ता विभिन्न बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ फेसबुक के डाटा शेयरिंग डील की आपराधिक जांच कर रहे हैं।

इस बात की जांच की जाएगी कि फेसबुक किस तरह से कारोबार करती है। मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि न्यूयॉर्क की ग्रैंड ज्यूरी ने कम से कम दो बड़ी स्मार्टफोन व अन्य उपकरण निर्माता कंपनियों से उनके रिकॉर्ड मंगाए हैं। दोनों ही कंपनियों का फेसबुक से करार था और उन्हें फेसबुक के करोड़ों यूजर्स के डाटा तक पहुंच मिली हुई थी।

दोनों कंपनियां अमेजन, एपल, माइक्रोसॉॅफ्ट और सोनी जैसी उन 150 कंपनियों में शुमार हैं, जिन्होंने फेसबुक के साथ डाटा शेयरिंग डील खत्म की है। इन कंपनियों को फेसबुक यूजर्स की फ्रेंडलिस्ट और कॉन्टेक्ट इन्फॉर्मेशन व अन्य डाटा देखने की इजाजत इस डील के तहत मिली थी। कई बार यूजर की जानकारी के बिना कंपनियां ऐसा करती थीं। फेसबुक ने इनमें से ज्यादातर साझेदारियां पिछले दो साल में खत्म की हैं।

इस मामले में फेसबुक प्रवक्ता का कहना है कि कंपनी जांच में पूरा सहयोगी कर रही है। ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क के यूएस अटॉर्नी ऑफिस के जांचकर्ताओं की निगरानी ग्रैंड ज्यूरी इस मामले की जांच कर रही है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जांच कब शुरू की गई और इसमें किन पहलुओं को देखा जाएगा।

फेडरल ट्रेड कमीशन और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन भी फेसबुक के खिलाफ जांच कर रहे हैं। राजनीतिक परामर्श कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका का मामला सामने आने के बाद से न्याय विभाग की सिक्योरिटी फ्रॉड जांच इकाई ने भी फेसबुक के खिलाफ जांच शुरू की है। आरोप है कि कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के 8.7 करोड़ यूजर्स के डाटा के जरिये अमेरिका के राष्ट्रपति पद के चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी अभियानों में मदद की थी।