नई दिल्ली। दुनियाभर में एसी की मांग तेजी से बढ़ रही है। 2050 तक एसी के इस्तेमाल के लिए बिजली की मांग तीन गुना हो जाएगी। इसलिए एसी में कूलिंग के लिए ऐसी तकनीक विकसित करने की जरूरत है, जिसमें बिजली की खपत कम हो। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आइईए) ने मंगलवार को यह बात कही।

"द फ्यूचर ऑफ कूलिंग" के नाम से जारी रिपोर्ट में आइईए ने एसी की कूलिंग को लेकर दक्षता के नए मानकों की जरूरत पर बल दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि घरों और दफ्तरों में एसी के बढ़ते उपयोग के कारण 2050 तक इसके प्रयोग के लिए बिजली की मांग तीन गुना हो जाएगी।

इसके लिए अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान की कुल वर्तमान बिजली क्षमता के बराबर नई बिजली क्षमता तैयार करने की जरूरत पड़ेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भवनों में 1.6 अरब एसी लगे हैं। 2050 तक इनकी संख्या 5.6 अरब हो जाने का अनुमान है। इसका अर्थ है कि अगले 30 साल तक हर सेकेंड 10 एसी की बिक्री होगी।

वर्तमान समय में विभिन्न भवनों में खपत होने वाली बिजली का पांचवां हिस्सा एसी और पंखों पर खर्च होता है। यह दुनिया की कुल बिजली खपत के 10 फीसद के बराबर है। विकासशील देशों में आय और जीवनस्तर में सुधार के साथ गर्म क्षेत्रों में एसी की मांग तेजी से बढ़ रही है। 2050 तक बिजली की खपत के मामले में औद्योगिक मांग के बाद एसी का दूसरा स्थान होगा।

आइईए के डायरेक्टर फतीह बायरल ने कहा, "बढ़ती मांग को देखते हुए जरूरी है कि एसी की दक्षता बढ़ाई जाए। नए एसी के लिए मानक जरूरत से बहुत कम हैं।" दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में एसी का स्तर भी अलग है। जापान और यूरोपीय संघ में बिकने वाले एसी अमेरिका और चीन के एसी की तुलना में 25 फीसद ज्यादा बेहतर हैं।