नई दिल्ली। गूगल ने पिछले दिनों मिर्जा गालिब को याद करने के बाद अब अपना डूडल कन्नडा के मशहूर लेखक और कवि को समर्पित किया है। यह कवि 20वीं सदी के कवि और लेखक कुप्पाली वेंकटप्पा पुटप्पा हैं जिन्हें श्रद्धांजलि देते हुए यह डूडल बनाया गया है।

आज उनकी 113वीं जयंती है। कुवेम्पु नाम से लोकप्रिय कुप्पाली ने कन्नड़ साहित्य को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। आज ही के दिन वर्ष 1904 में कुवेम्पु का कर्नाटक के शिमोगा जिले में जन्म हुआ था। कुवेम्पू को उनके समय के सबसे महान कन्नड़ लेखकों में से एक माना जाता है। कन्नड़ भाषा का ये महान कवि और लेखक 11 नवंबर, 1994 को इस दुनिया को अलविदा कर चला गया। उनका निधन मैसूर में हुआ।

20वीं सदी के महानतम कन्नड़ कवि

कुप्पाली वेंकटप्पा पुटप्पा को 20वीं शताब्दी के महानतम कन्नड़ कवि की उपाधि दी जाती है। ये कन्नड़ भाषा में ज्ञानपीठ सम्मान पाने वाले पहली शख्सियत थे। कुवेम्पु कन्नड़ भाषा के प्रखर समर्थक थे और इनका कहना था कि कर्नाटक की शिक्षा का माध्यम कन्नड़ भाषा ही होना चाहिए।

कन्नड़ और कुवेम्पु के बीच का नाता

कुवेम्पु ने अधिकांश कविताएं और लेख कन्नड़ में लिखे और वे कन्नड़ भाषा के मजबूत अभियोक्ता भी थे। उन्होंने कन्नड़ भाषा को अनुसंधान करने के लिए मैसूर विश्वविद्यालय में एक संगठन की स्थापना की, जिसका नाम "कुवेम्पु इंस्टीट्यूट ऑफ कन्नड़ स्टडीज" रखा गया।

अपने लेखन से सबका जीता दिल

कुवेम्पु ने अपने लेखन में जातिवाद और अर्थहीन धार्मिक अनुष्ठान के प्रति नाराजगी जताई। उन्हें रामायण को नए सिरे से व्याख्यायित करने के लिए भी खास तौर से पहचाना जाता है। उन्हें 'श्री रामायण दर्शनम' नामक महाकाव्य रामायण के अपने संस्करण के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने इस किताब में रामायण को आधुनिक नजरिये से पेश किया। उनकी कविताओं में प्रकृति की सुंदरता का उल्लेख करती हैं।

कई बार हुए सम्मानित

- 1988 में उन्हें पद्मविभूषण से नावाजा गया

- 1958 में कर्नाटक सरकार ने राष्ट्रकवि के सम्मान से नवाजा

- 1992 में कर्नाटक सरकार ने उन्हें कर्नाटक रत्न का सम्मान दिया