वॉशिंगटन। लंबी दूरी की यात्रा करते समय मोबाइल फोन या अन्य गैजेट्स को चार्ज करने की समस्या बनी रहती है। अब यह परेशानी जल्द दूर होगी। वैज्ञानिकों ने धातु से बने एक छोटे टैब को विकसित करने में सफलता हासिल की है जो मानव शरीर की गतिविधियों से बिजली उत्पन्न कर सकता है। मानव शरीर ऊर्जा का भंडार है।

अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी एट बफैलो के वैज्ञानिकों ने इसे ही आधार मानकर "टैब" को विकसित किया है। जब भी कोई वस्तु दूसरे वस्तु के संपर्क में आती है तो वह चार्ज या आवेशित होकर ट्राइबोइलेक्ट्रिसिटी उत्पन्न करती है। ट्राइबोइलेक्ट्रिक प्रभाव का उपयोग करने वाले नैनो जेनरेटर को बनाना मुश्किल होने के साथ ही महंगा भी होता है।

यूनिवर्सिटी एट बफैलो और चाइनीज अकादमी ऑफ साइंसेज के शोधकर्ताओं के बनाए टैब ने इन दोनों समस्याओं को खत्म कर दिया है। इस टैब में सोने की दो पतली सतह के बीच सिलिकॉन से बने पॉलीमर "पॉलीडाइमिथाइलसिलोक्सेन" (पीडीएमएस) को लगाया गया है।

सोने की एक सतह को इस तरह खींचा गया है कि वह एक छोटी पर्वत श्रेणी की तरह दिखाई दे। जब शरीर की किसी गतिविधि जैसे अंगुलियों के मुड़ने से इस डिवाइस पर बल लगता है तो सोने और पीडीएमएस के बीच घर्षण उत्पन्न होता है। इससे सोने की परत के बीच इलेक्ट्रॉन का बहाव तेज होने से इलेक्ट्रिसिटी उत्पन्न होती है।

करीब 1.5 सेंटीमीटर लंबे और एक सेमी चौड़े टैब से 124 वोल्ट(वोल्टेज) बिजली उत्पन्न होती है। इतनी ऊर्जा से स्मार्टफोन तो नहीं लेकिन लाल रंग की 48 एलईडी लाइट एक साथ जल सकती हैं। वैज्ञानिक कोशिश कर रहे हैं कि इस टैब में सोने की बड़ी परत का इस्तेमाल करें जिससे ज्यादा से ज्यादा बिजली उत्पन्न हो सके। इसके साथ टैब से उत्पन्न ऊर्जा को बैटरी में संग्रह किए जा सकने की तकनीक को भी विकसित करने के लिए प्रयोग किया जा रहा है।