मल्टीमीडिया डेस्क। साल 2018 का नोबेल शांति पुरस्कार नादिया मुराद को दिया गया। यजीदी महिला नादिया आईएसआईएस के चंगुल में फंस गई थीं। उनके साथ जो शारीरिक और मानसिक अपराध किया गया, उससे जूझने के बाद नादिया ने अपने जैसी अन्य महिलाओं की मदद का काम शुरू किया। इसलिए नादिया को नोबेल दिया गया।

मगर, कम ही लोग जानते होंगे कि आज नादिया मुराद जो भी हैं, जहां भी हैं, उसके पीछे अमेरिकन अभिनेता जॉर्ज क्लूनी की पत्नी अमाल क्लूनी का हाथ है। अमाल ने ही नादिया की कहानी को दुनिया के सामने लाने का काम किया। उन्होंने नादिया को तैयार किया कि वह भाषा न आते हुए भी अपनी बात मजबूती से संयुक्त राष्ट्र में खुद उठाएं ताकि दुनिया के सामने आतंकी संगठन आईएस का घिनौना चेहरा सामने लाया जा सके। इसके लिए अमाल ने खुद आईएसआईएस के खिलाफ ऐसे सबूत जुटाए, ताकि वह मामला न सिर्फ संयुक्त राष्ट्र के सामने रखा जा सके, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के अन्य सदस्यों को भी सबूतों के आधार पर एक मंच पर ला सके।

अमाल अलामुद्दीन क्लूनी पेशे से मानवाधिकार वकील हैं। मूल रूप से लेबनान की रहने वाली ब्रिटिश बैरिस्टर अमाल हर उस शख्स के पीछे खड़ी रहती हैं, जो सही है, जिसके साथ अन्याय हो रहा है, जो हर तरफ से घिर गया है, बेसहारा है और जिसे मदद की कोई किरण नहीं दिख रही है। अमाल हमेशा दूसरे छोर पर खड़े उन लोगों की आवाज पूर जोर तरीके से उठाती हैं, जिनके साथ खड़े होने की हिम्मत कम ही लोग जुटा पाते हैं।

बुलंद हौंसले वाली यह महिला विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज के प्रत्यर्पण का मामला भी उठा चुकी हैं। विकिलीक्स पर काम करने से पहले वे एक कंप्यूटर प्रोग्रामर और हैकर थे। विकिलीक्स पर उनके किए गए कामों के लिए 2008 में उन्हें इकॉनोमिस्ट फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन अवॉर्ड और 2010 में सेम एडम्स अवॉर्ड दिया गया।

असांज ने इराक युद्ध से जुड़े लगभग चार लाख दस्तावेज अपनी वेबसाइट पर जारी किए थे। इसमें अमेरिका, इंग्लैंड एवं नाटो की सेनाओं के गंभीर युद्ध अपराध करने के अकाट्य प्रमाण मौजूद थे। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा तक ने उन्हें इसके खिलाफ चेतावनी दी थी। इसके बाद से ही गिरफ्तारी के डर से वह कई देशों में छिपकर रहे। फिलहाल वह ब्रिटेन स्थित इक्वाडोर की एंबेसी में रह रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें वहां से निकाला जा सकता है। इसके साथ ही उनकी गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है।

इसके अलावा अमाल ने यूक्रेन की राष्ट्रपति यूलिया टोमोशेंको और मिस्र-कनाडा के पत्रकार मोहम्मेद फाहमी का भी केस मजबूती से उठाया था।

अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अच्छी जानकारी

अमाल क्लूनी अमेरिका और लंदन में प्रैक्टिस करने वाली एक क्वालीफाइड लायर हैं। उन्हें 2002 में न्यूयॉर्क में व 2010 में इंग्लैंड और वेल्स में काम करने की इजाजत मिली थी। वह द हेग में इंटरनेशनल कोर्ट्स में प्रैक्टिस कर चुकी हैं। इसके साथ ही वह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस और द इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में भी काम कर चुकी हैं।

परोपकार के काम में भी हैं आगे

वह क्लूनी फाउंडेशन फॉर जस्टिस की प्रेसिडेंट हैं, जिसे उन्होंने साल 2016 में अपने पति जॉर्ज क्लूनी के साथ बनाया था। इसकी मदद से वह दुनिया भर के कोर्टरूम, समुदायों और कक्षाओं में न्याय को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने ऑरोरा ह्यूमेनिटेरियन इनीशिएटिव के साथ पार्टनरशिप कर अमाल क्लूनी स्कॉलरशिप शुरू की है। इसके तहत दो साल के अंतरराष्ट्रीय स्तर के इंटरनेशनल बकालॉरेट प्रोग्राम (आईबी) के लिए लेबनान से हर साल एक छात्रा को यूनाइटेड वर्ल्ड कॉलेज दिलिजान में भेजा जाता है। इसके अलावा वह कई अन्य परोपराकी कामों से जुड़ी हैं।