इस्लामाबाद। पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा पाने वाली ईसाई महिला आसिया बीबी कनाडा पहुंच गई हैं। बीते साल 31 अक्टूबर को पाकिस्तान की उच्चतम न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया था। उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने दो बार बरी किया। इस महीने उन्हें पाकिस्तान छोड़ने की इजाजत मिली। मगर, इससे पहले आसिया बीबी को झूठे मामले में पाकिस्तान की जेल में आठ साल बिताने पड़े थे। उन्हें साल 2010 में ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी।

आसिया को भले ही देर से ही सही, इंसाफ मिल गया है, लेकिन कई अन्य लोग उनकी तरह भाग्यशाली नहीं हैं। पाकिस्तान की जेल में करीब 40 लोग ईशनिंदा के मामले में जेल में बंद हैं या दोषी ठहराए जा चुके हैं। इसमें से आधे लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी गई है, जबकि आधों को मौत की सजा दी गई है, लेकिन किसी को भी अभी तक पाकिस्तान में ईशनिंदा के अपराध में फांसी पर लटकाया नहीं गया है। फिर भी कई लोग अपील के इंतजार में एकांत कारावास में रहने को मजबूर हैं।

आसिया की तरह ही एक अनपढ़ ईसाई कैदी है। वह सड़क साफ करने का काम करता था। शराब पीते समय उसका अपने मुस्लिम दोस्त से झगड़ा हो गया। उसने ईशनिंदा का आरोप लगा दिया और वह ईसाई अब जेल में बंद है। दूसरा मामला अमेरिका में पढ़े यूनिवर्सिटी प्रोफेसर का है, जिसके फेसबुक पोस्ट ने मुस्लिम छात्र कार्यकर्ताओं को नाराज कर दिया और उन पर ईशनिंदा का केस दर्ज हो गया। तीसरी मामला एक अधेड़ महिला है, जिसे आसिया बीबी के सेल में रखा गया है।

आसिया को अदालत से बरी करने और विदेश में जाने की इजाजत मिलने से ईशनिंदा के आरोप में जेल की सजा काट रहे दूसरे लोगों में उम्मीद जगी है। हालांकि, लंबे समय से जेल में बंद कैदियों के वकीलों और परिवार का कहना है कि आसिया की तरह उनके भाग्य का फैसला होने की आशा कम ही है। ईशनिंदा करने वाले आरोपियों का समाज बहिष्कार करता है, बहुत कम वकील उनके केस लड़ते हैं और निचली अदालतों पर आरोपियों को दोषी ठहराने का दबाव होता है। अपील अदालतें सालों के तनाव, अलगाव और कैदियों के खराब होते स्वास्थ्य को देखते हुए आमतौर पर मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल देती हैं।