लंदन। ब्रिटेन के एक न्यायाधीश ने 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार से संबंधित दस्तावेजों को अवर्गीकृत करने का आदेश दिया है। इस फाइल के सामने आने से ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन की संलिप्तता पर प्रकाश पड़ सकता है। न्यायाधीश ने ब्रिटिश सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि इससे भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ते को क्षति पहुंच सकती है।

न्यायाधीश मुरी शांक्स की अध्यक्षता में मार्च में लंदन में फर्स्ट टीयर ट्रिब्यूनल (सूचना का अधिकार) में तीन दिनों तक सुनवाई चली थी। उन्होंने एक दिन पहले सोमवार को कहा कि अवधि से संबंधित अधिकांश फाइलें सार्वजनिक की जानी चाहिए। न्यायाधीश ने ब्रिटिश सरकार की इस दलील को ठुकरा दिया कि डाउनिंग स्ट्रीट कागजात को अवर्गीकृत करने से भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ता क्षतिग्रस्त हो जाएगा।

न्यायाधीश ने हालांकि ब्रिटेन की संयुक्त खुफिया समिति से "इंडिया पोलिटिकल" के रूप में चिह्नित फाइल पर दलील स्वीकार नहीं की। इस फाइल में ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों एमआई5, एमआई6 और जीसीएचक्यू (गवर्नमेंट कम्युनिकेशन हेडक्वार्टर) से संबंधित सूचनाएं हो सकती हैं। न्यायाधीश ने कहा कि इसलिए कैबिनेट कार्यालय तकनीकी रूप से उस व्यवस्था पर कायम रह सकता है जिसके तहत ऐसी सामग्री को सूचना की आजादी अपील से छूट मिली हुई है।