लंदन। Brexit (यूरोपीय यूनियन से अलगाव) से संबंधित शर्तों का विधेयक प्रधानमंत्री टेरीजा में 3 जून को एक बार फिर से ब्रिटिश संसद के सामने रखेंगी। चौथी बार भी अगर यह विधेयक संसद में गिर गया तो Brexit और पीएम टेरीजा की कुर्सी खतरे में पड़ सकती हैं। इससे पहले तीन बार सरकार का Brexit संबंधी प्रस्ताव संसद में गिर चुका है।

सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी के कुछ सांसद भी Brexit के लिए सरकार की कुछ शर्तों का विरोध कर रहे हैं। सरकार ने सरकार में सहयोगी डीयूपी, विपक्षी लेबर पार्टी समेत सभी राजनीतिक दलों से संसद में आने वाले विधेयक की बाबत बात की है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार Brexit की कुछ शर्तों में बदलाव पर राजी हो गई है। सरकार को उम्मीद है कि इस बार हाउस ऑफ कॉमंस में वह अपना प्रस्ताव पारित कराने में सफल हो जाएगी। अगर ऐसा नहीं हो पाया तो टेरीजा सरकार का जाना भी लगभग तय माना जा रहा है। क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह समय ब्रिटिश सरकार के लिए सबसे मुश्किल साबित हो रहा है।

पहली बार सरकार को बार-बार विरोधी दलों से समर्थन का अनुरोध करना पड़ रहा है लेकिन उनका साथ नहीं मिल रहा। इधर यूरोपीय यूनियन के 27 देश उस पर जल्द अलगाव के लिए दबाव बनाए हुए हैं। वे चाहते हैं कि शर्तें तय हों और अलगाव हो, जिससे वे अपने अनुसार आगे की रूपरेखा बना सकें।

यूरोपीय यूनियन ने ब्रिटेन को Brexit के लिए 31 अक्टूबर तक का वक्त दिया है। यह समय भी दो बार बढ़ाया गया है।