वाशिंगटन। भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के रणनीतिक इरादों के चलते अस्थिरता की स्थिति बन गई है। ट्रंप प्रशासन ने बुधवार को चीन की बढ़ती दखलंदाजी पर चिंता जताते हुए हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अमेरिकन कांग्रेस में सांसदों से मुखातिब एशिया-प्रशांत सुरक्षा मामलों के सहायक सचिव रैंडल श्राइवर ने कहा कि अमेरिका चीन के साथ रचनात्मक और फलीभूत संबंध बनाए रखेगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नीतियों का उल्लंघन कतई स्वीकार नहीं करेगा। हम भारत-प्रशांत क्षेत्र को निर्बाध बनाए रखने के पक्षधर हैं।

रैंडल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए चीन को सभी देशों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। हालांकि, हाल के वषोर् में चीन ने रणनीतिक इरादे जाहिर किए हैं। मसलन दक्षिण चीन सागर में पहले ही चीन के एकछत्र दावे से इतर वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान ने भी इस जलमार्ग पर अपना दावा जताया है। इससे क्षेत्र में जब-तब तनाव की स्थिति बन जाती है। रैंडल ने कहा कि विषम परिस्थितियों में हम दूसरे देशों के साथ खड़े होने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सभी छोटे-बड़े देशों की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए।

भारत प्रमुख रक्षा साझीदार, सहयोग के लिए दरवाजा खुला

भारत को प्रमुख रक्षा साझीदार बताते हुए पेंटागन अधिकारी रैंडल ने कहा कि वर्ष 2016 में अमेरिका से मान्यता मिलने के बाद हम सीमा-समुद्री सुरक्षा और आतंक रोधी अभियानों में खुलकर सहयोग कर रहे हैं। भारत को अति संवेदनशील सुरक्षा प्रणाली बेचने का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा के साथ रक्षा सौदों और तकनीक के आदान-प्रदान से दोनों देशों के संबंध और प्रगाढ़ होंगे।