वॉशिंगटन। शीर्ष आईटी कंपनियों जैसे फेसबुक और गूगल का प्रतिनिधित्व करने वाले अमेरिकी नियोक्ताओं के कोलीजन ने आरोप लगाया है कि यूएस सिटिजन एंड इमिग्रेशन सर्विस (USCIS) अपने नियमों के बाहर काम कर रही है। कोलिजन ने कहा कि 'एच-1बी' वीजा रोके जाने की संख्या में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि हुई है।

बताते चलें कि एच1 बी वीजा अप्रवासी वीजा है। इसके जरिए अमेरिकी कंपनियां थ्योरेटिकल या टेक्निकल विशेषज्ञता वाली नौकरियों पर विदेशी कर्मचारियों को हायर कर सकती हैं। भारत और चीन जैसे देशों से हर साल हजारों लाखों कर्मचारियों को टेक्नोलॉजी कंपनियां नौकरी पर रखती हैं।

कंपीट अमेरिका ने होमलैंड सिक्योरिटी के सचिव क्रिस्टजेन नेल्सन और USCIS के डायरेक्टर फ्रांसिस सिस्ना को लिखे पत्र में कहा कि हमने तीन बदलाव देखे हैं। इन बदलावों के कानूनी पहलुओं के बारे में चिंता जाहिर करते हुए कोलिजन कंपीट अमेरिका ने कहा कि एच1बी वीजा को लेकर एजेंसी का मौजूदा दृष्टिकोण विधायिका या नियामक तरीको को जाहिर नहीं करता है।


बताते चलें कि ट्रंप प्रशासन आईटी पेशवरों में विशेष रूप से लोकप्रिय एच-1बी वीजा के वर्तमान प्रावधानों में कुछ बदलाव करना चाहता है। इसके जरिये बेहद कुशल विदेशी पेशेवरों को वीजा दिए जाने की बात कही जा रही है, ताकि यह सिर्फ आउटसोर्सिंग का तरीका बनकर न रह जाए।

वाइट हाउस में पॉलिसी कोऑर्डिनेशन के लिए डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ क्रिस लिडल ने कहा कि राष्ट्रपति का मानना है कि बेहद कुशलता वाले क्षेत्र जैसे कि टेक्नॉलजी के क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त करने वाले लोग देश में रुकें।

उन्होंने इस बात को कई बार सार्वजनिक तौर पर भी कहा है। उन्हें आव्रजन में यह बेहद सकारात्मक हिस्सा लगता है। हालांकि, लिडल ने माना कि अगर यह मुद्दा कांग्रेस में पहुंचा तो इसे लेकर काफी विवाद हो सकता है।