जेनेवा। संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत में बड़े पैमाने पर कृषि-सहायता योजनाओं की विश्व व्यापार संगठन (WTO) के अन्य सदस्यों द्वारा जांच की जा रही है। WTO की त्रैमासिक कृषि समिति की बैठक में किए गए सवालों को सोमवार को पेश किया गया। डब्ल्यूटीओ में भुगतान के आकार और प्रकृति के बारे में सख्त नियम हैं और सदस्य सरकारें किसी भी धोखा दे सकने वाले प्रतिद्वंद्वी पर कड़ी निगरानी रखती हैं।

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ने कृषि आय को प्राथमिकता दी है। ट्रंप जहां चीन के साथ चल रहे टैरिफ युद्ध से हुए घरेलू नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं पीएम मोदी भारत की कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था में मंदी का सामना कर रहे हैं।

ऐसे में यूरोपियन यूनियन ने भारत से कहा है कि वह यह बताए कि पीएम मोदी साल 2022 तक कृषि और ग्रामीण विकास पर 25 ट्रिलियन रुपए (357.5 अरब डॉलर) खर्च करने का प्रस्ताव कैसे रख रहे हैं? इसके साथ ही पीएम मोदी साल 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करके 100 ट्रिलियन रुपए कैसे करेंगे? यूरोपियन यूनियन ने पूछा है कि अतिरिक्त उत्पादन को रोकने के लिए किए गए उपायों और वैश्विक बाजार मूल्यों को ध्यान में रखते हुए इसे कैसे किया जाएगा?

संयुक्त राज्य अमेरिका ने गैर-बासमती चावल के लिए पांच फीसद एक्सपोर्ट सब्सिडी और बढ़ी कीमतों पर गेहूं की खरीद पर सवाल किया। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने कृषि के लिए भारत की नई "परिवहन और मार्केटिंग सहायता" का विवरण भी जानना चाहा। ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि यह एक निर्यात सब्सिडी थी, जिसे चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाना चाहिए।