इस्लामाबाद। आतंकी संगठनों के अर्थतंत्र पर कार्रवाई पर पाक सरकार की कार्रवाई को लेकर FATF ने पाकिस्तानी अधिकारियों से सीधे सवाल पूछे हैं। वित्त सचिव मुहम्मद यूनुस डाघा के नेतृत्व में चीन पहुंचे अधिकारियों ने हाल के महीनों में आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई का लेखा-जोखा फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के समक्ष रखा। बताया कि पाकिस्तान गंभीरता के साथ आतंकी संगठनों के अर्थतंत्र पर प्रहार कर रहा है। FATF की एशिया-प्रशांत शाखा की दो दिवसीय बैठक चीन के ग्वांग्झू शहर में गुरुवार को खत्म हुई है।

बैठक में आतंकी संगठनों को प्रश्रय और आर्थिक मदद मिलने के बारे में पाकिस्तानी अधिकारियों से सवाल पूछे गए। यह भी पूछा गया कि पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों के खिलाफ क्या कदम उठाए। मनी लांड्रिंग रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। पाकिस्तान पहले से ही FATF की ग्रे लिस्ट में है, ब्लैक लिस्ट में डाले जाने का खतरा उस पर मंडरा रहा है।

ब्लैक लिस्ट में डाले जाने पर उसे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मदद मिलनी मुश्किल हो जाएगी, विदेशी पूंजीनिवेश के रास्ते में भी रुकावटें बढ़ जाएंगी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए FATF की ओर से कोई भी कड़ाई मुश्किल बढ़ाने वाली होगी।

समाचार पत्र डॉन के मुताबिक बैठक में शामिल कुछ सदस्य देशों की तरफ से पाकिस्तान से बेहद कड़े सवाल पूछे गए। भारत के प्रतिनिधि ने कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की गंभीरता के बारे में जानना चाहा और कार्रवाई के असर के बारे में पूछा। तीन मई को भारतीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साफ कर दिया था कि भारत FATF से पूछेगा कि आतंकी अर्थतंत्र पर कार्रवाई में विफल रहने पर पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में क्यों नहीं डाला जा रहा।

एशिया-प्रशांत शाखा इकाई जल्द ही अपनी रिपोर्ट FATF के पेरिस स्थित कार्यालय में दाखिल करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर FATF फैसला करेगा कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बनाए रखना है या नहीं। ग्रे लिस्ट में आतंकी संगठनों की मदद करने वाले संदेहास्पद देश रखे जाते हैं और उन पर कार्रवाई के लिए दबाव डाला जाता है।