वॉशिंगटन। आज हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसे खतरनाक बीमारी हो गई थी। डॉक्टरों ने कहा था कि वह छह महीने भी जीवित नहीं रहेगा, लेकिन वह 102 साल तक जिया और प्राकृतिक रूप से मरा। यह कहानी है स्टैमेटिस मोराइटिस की।

60 साल के जीवन में उन्हें फेफड़ों के कैंसर होने का पता चला था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने इस भयंकर बीमारी के इलाज की तलाश शुरू कर दी। कई डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि अगर वह कीमोथैरेपी नहीं कराते हैं, तो वह छह महीने के अंदर ही मर जाएंगे।

हालांकि, उन्होंने रेडिएशन से इनकार कर दिया और अमेरिका से ग्रीस में अपने शहर लौट आए। सबसे पहले वह उदास हो गए, लेकिन थोड़े दिनों के बाद कुछ अविश्वसनीय हुआ। इस आदमी ने खुद को सक्रिय करने का फैसला किया।

वह एक पहाड़ी पर गए, जहां ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च स्थित था। उन्होंने स्थानीय निवासियों से बात की और देशी शराब की दो बोतलों लीं। अगले कुछ महीनों में वह खुद को पहले से मजबूत महसूस करने लगे। इसके बाद उन्होंने वाइन बनाने के लिए अपना बगीचा लगाया। वह सुबह जल्दी उठने लगे और पूरे दिन खुले आसमान में बिताते थे।

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इस दौरान वह बगीचे में काम करते थे और रात में स्थानीय बार में चले जाते थे। वह खुश रहते थे और इसी तरह से समय बीतता चला गया और वह पहले से कहीं ज्यादा स्वस्थ होते जा रहे थे। उन्होंने अपने घर का नवीनीकरण किया और बड़े पैमाने पर देशी शराब का उत्पादन करने लगे।

जब वह 97 साल हो गए, तो उन्होंने महसूस किया कि उनकी मौत कैंसर की वजह से नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने सोचा क्यों न अस्पताल में जाकर उन डॉक्टरों से मिला जाए, जिन्होंने उन्हें देखकर कहा था कि वह छह महीने से अधिक नहीं जिएंगे। मगर, दुर्भाग्य से उनमें से कोई भी डॉक्टरों तब जीवित नहीं मिला।

स्टैमोटिस ने कीमोथेरेपी लेने से इंकार कर दिया था। मगर, बावजूद इसके वह कई साल तक जिए। वह गांव में चले गए और 102 साल की उम्र पूरी करने के बाद प्राकृतिक मौत से मरे। इसका राज था कि वह खुश रहते थे, खुली स्वच्छ हवा में सांस ले रहे थे और उन्होंने अपने मन में एक बार भी यह विचार नहीं आने दिया कि उन्हें कोई बीमारी है।

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