मॉस्को। रूस में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक महिला का मानना था कि एड्स का वायरस एक मिथक है और इसलिए उसने अपने पांच महीने के बच्चे का एचआईवी का इलाज कराने से इंकार कर दिया। बच्चे की मौत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

महिला को पांच साल से अधिक समय से एचआईवी पॉजिटिव है। वह हमेशा चिकित्सा उपचार से इंकार करती रही। साइबेरियाई के इरकुत्स्क शहर में रहने वाली महिला के खिलाफ हत्या का आरोप लगाया गया है और इसके लिए उसे दो साल की जेल हो सकती है।

जांचकर्ताओं ने बताया कि फरवरी में बच्चे की निमोनिया से मौत हो गई। जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, उनमें इसकी वजह से लंग इंफेक्शन हो जाता है। बच्चे की मां खुद भी एचआईवी पॉजिटिव थी और उसने अपनी बेटी का इलाज कराने से भी इंकार कर दिया था।

रीजनल एड्स केंद्र ने कहा कि जब बच्ची को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, तो उसे एड्स होने की जानकारी मिली थी। पांच महीने की बच्ची के लंग्स अंदर से फट गए थे। मगर, महिला अपनी बात पर अड़ी हुई थी कि एचआईवी एक मिथक है। बच्चे की मृत्यु के बाद महिला ने अस्पताल के कर्मचारियों को बच्ची की मौत का दोषी ठहराया और दावा किया कि छोटी लड़की की मौत निमोनिया से हुई है।

सरकार के मुताबिक करीब नौ लाख से अधिक रूसी एचआईवी से पीड़ित हैं और हर घंटे एचआईवी के 10 नए मामले सामने आ रहे हैं। एचआईवी की वजह से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है और एड्स हो जाता है, जिससे बचने के लिए ज्यादातर लोगों को रोजाना ट्रीटमेंट लेने की जरूरत होती है।

अधिकारी और कार्यकर्ताओं का कहना है कि ज्यादातर लोगों का मानना है कि एड्स-पैदा करने वाले वायरस पश्चिम की खोज है और यह एक मिथक है। इसी वजह से एचआईवी से पीड़ित करीब आधे ही रूसी लोग एंटीरेट्रोवाइरल दवाओं को ले रहे हैं।