लंदन। भारत ने ब्रिटेन के साथ आपराधिक रिकार्ड साझा करने और अवैध आव्रजकों की वापसी पर दो सहमति पत्रों पर दस्तखत किए हैं। भारत सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों ने ब्रिटेन के एक विशेष कार्यक्रम में वहां रह रहे भारतीयों से मुलाकात भी की।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु और गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ब्रिटेन दौरे पर अपने प्रतिपक्षी नेताओं के साथ बातचीत के लिए ब्रिटेन आए हैं। रिजिजू ने ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री कैरोलाइन नोक्स के साथ आपराधिक रिकार्ड साझा करने और अवैध आव्रजकों की वापसी पर सहमति पत्र पर दस्तखत किए।

अप्रैल में राष्ट्रमंडल देशों के प्रमुखों की ब्रिटेन में होने वाली बैठक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दस्तखत करेंगे। वहीं, सुरेश प्रभु यहां भारत-ब्रिटेन संयुक्त आर्थिक और व्यापार समिति की बैठक की सह-अध्यक्षता करने आए थे।

सुरेश प्रभु और किरण रिजिजू ने शनिवार को ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिटेन में बसे भारतीयों की साझेदारी से भारत के विकास का सच्चा सामर्थ्य नजर आने लगेगा।

हम मिलकर कल के भारत को आकार देंगे। अपने दौरे के दूसरे और अंतिम दिन सुरेश प्रभु ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि ब्रिटेन में बसे भारतीयों की ताकत भारत के विकास में सहायक होगी। उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की उपलब्धियों को "नए भारत की नई सुगंध" बताया।

उत्तरी लंदन में दलित नेता आंबेडकर को श्रद्धांजलि देने के बाद कहा कि ऐसा पहली बार है जब हमें ऐसा प्रधानमंत्री मिला है जिसने देश की अधिकांश समस्याओं के समाधान के लिए वर्ष 2022 की समय-सीमा निर्धारित की है। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर होने के बजाय नए विचारों पर तवज्जो देते हुए प्रभु ने कहा कि उनका ब्रिटेन दौरा ब्रेक्जिट के बाद के एजेंडा पर खरा उतरा है।

प्रभु के कैबिनेट सहयोगी रिजिजू ने कहा कि विश्व भर में भारतीयों की मदद के लिए पर्सन्स ऑफ इंडियन ओरिजन (पीआइओ) और ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआइ) के दस्तावेज बनाने के लिए मदद मुहैया कराई जा रही है। साथ ही ई-वीजा योजना के विस्तार के लिए 160 देशों में तैयारी है।