लंदन। किसी भी विषय में पीएचडी किए आवेदकों को वीजा देने में ब्रिटेन हर तरह की रुकावट खत्म करने जा रहा है। ब्रिटिश सरकार के ताजा फैसले का सबसे ज्यादा फायदा भारतीयों को होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन में दक्ष पेशेवरों की श्रेणी में सर्वाधिक वीजा भारतीयों को ही मिलते हैं।

ब्रिटेन के चांसलर फिलिप हैमोंड ने बुधवार को बजट अपडेट में यह घोषणा की। उन्होंने कहा, ‘इस साल के अंत से उच्च शिक्षित लोगों के ब्रिटेन आने की संख्या कुछ शर्तों के साथ असीमित होगी। वे ब्रिटेन में काम करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।’

ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों ने सरकार के ताजा फैसले का स्वागत किया है। इससे शिक्षा और शोध का स्तर बेहतर होने की उम्मीद जताई है। चांसलर फिलिप हैमंड ने सरकार के फैसले की संसद में घोषणा करते हुए कहा, उच्च दक्षता प्राप्त वीजा आवेदकों के ब्रिटेन आकर काम करने पर लगी हर तरह की रोक हटाई जा रही है।

ब्रिटेन की नौकरियों के लिए उच्च दक्ष लोग आवेदन करें और नियुक्ति पाने के बाद सामान्य तरीके से आकर कार्य करें। इस तरह के वीजा जारी करने के लिए संख्या की कोई सीमा नहीं होगी। जहां जितनी आवश्यकता महसूस की जाएगी-उतने वीजा जारी किए जाएंगे।

यह निर्णय तकनीक क्रांति का फायदा उठाने और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए किया गया है। कुछ हफ्तों बाद यह नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। साथ ही सरकार आव्रजन नियमों में बदलाव कर विदेशी शोधकर्ताओं की 180 दिनों से ज्यादा की गैरमौजूदगी पर उन्हें आर्थिक रूप से दंडित नहीं करेगी।

हाल ही में ब्रिटेन के गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों में 2018 में उच्च दक्षता वाले पेशेवरों के लिए जारी हुए वीजा के सर्वाधिक प्राप्तकर्ता भारतीय थे। वर्ष 2018 में कुल उच्च दक्षता वाले पेशेवरों के लिए जो वीजा जारी हुए उनमें से 54 प्रतिशत सिर्फ भारतीयों ने प्राप्त किए। यह सिलसिला कई वर्षों से जारी है।