काबुल। अफगानिस्तान के मतदाता मतपत्रों से खासे परेशान होने वाले हैं। दरअसल, एक वोट डालने के लिए उन्हें अखबार के आकार के मतपत्र यानी बैलेट पेपर को देखना होगा। इसमें 800 से अधिक नेताओं की तस्वीर 15 पेज में प्रकाशित होगी। लिहाजा, उन्हें अपना वोट डालने के लिए खासी मशक्क करनी होगी। बताते चलें कि 20 अक्टूबर को यहां चुनाव होने वाले हैं।

शहर के बाशिंदे लगातार आतंकी हमलों के खौफ के साये में जी रहे हैं। काबुल प्रांत का प्रतिनिधित्व करने के लिए संसदीय उम्मीदवारों की बड़ी संख्या है। यहां अफगानिस्तान की जनसंख्या का लगभग पांचवां हिस्सा रहता है, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है।

इंडिपेंडेंट इलेक्शन कमीशन वोटर रजिस्ट्रेशन डाटा के अनुसार, बताया जा रहा है कि यहां करीब 16 लाख से अधिक मतदाता हैं, जो किसी भी दूसरे प्रांत से अधिक हैं। यहां कांटे की चुनावी टक्कर होनी है, जिसमें 33 सीटों के लिए 800 नेता चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

कोई भी व्यक्ति दोबारा वोट नहीं डाल सके और चुनाव में किसी तरह का फर्जीवाडा रोकने के लिए बायोमीट्रिक मशीन का इस्तेमाल किया जाना है। हालांकि, इस बात का भी डर जताया जा रहा है कि वे मतदान केंद्रों में या तो सही समय पर नहीं पहुंच सकेंगी या फिर काम नहीं कर सकेंगी।

अफगानिस्तान के निचले सदन या वोलेसि जिर्गा के लिए चुनाव लड़ने वाले 2,500 से अधिक उम्मीदवारों का लगभग एक तिहाई यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। हर मतदाता केवल एक उम्मीदवार चुन सकता है। मगर, उन्हें काबुल के विशाल मतपत्र पेपर पर ढूंढना आसान नहीं होगा। अखबार के आकार के मतपत्र में उम्मीदवार को तलाशने में उन्हें निःसंदेह काफी समय लगेगा।

यह शायद ही आदर्श परिस्थित हो क्योंकि तालिबान या अन्य आतंकी समूहों के मतदान केंद्रों पर हमला करने का खतरा बड़ा है। आतंकवादियों ने मतपत्रों को इसे व्यवस्थित करने वालों को निशाना बनाने की बात कही है। आतंकी संगठनों ने चुनाव को "दुर्भावनापूर्ण अमेरिकी साजिश" करार दिया है।

मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने के लिए उम्मीदवार मतपत्र में अपना नंबर और मतपत्र के पेज की संख्या का प्रचार कर रहे हैं। वे अपनी तस्वीरों को भी लैंप पोस्ट, बिलबोर्ड में लगा रहे हैं। इसके साथ ही अशिक्षित मतदाताओं को पहचानने में कोई परेशानी नहीं हो, इसके लिए हर उम्मीदवार हथेली, पेड़ों, शेरों या चश्मा जैसे प्रतीकों की तस्वीरें भी लगा रहे हैं।