लाहौर। लाहौर हाई कोर्ट ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ,उनकी बेटी मरियम और अन्य नेताओं द्वारा न्यायपालिका के खिलाफ दिए जा रहे बयानों के प्रसारण पर 15 दिन की रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस संबंध में पाकिस्तान मीडिया नियामक प्राधिकरण (पीईएमआरए) को आदेश भी जारी किया है।

कोर्ट ने इसमें कहा है, पीईएमआरए टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाले न्यायापालिका विरोधी बयानों की निगरानी करेगा। 15 दिन के बाद संस्था इस पर एक रिपोर्ट कोर्ट में जमा करेगी।' इस मामले में कोर्ट ने शरीफ की अपील भी खारिज कर दी है।

हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने अमीना मलिक नामक एक याचिकाकर्ता की शिकायत पर यह आदेश दिया है। अमीना ने आरोप लगाया था कि शरीफ, उनकी बेटी मरियम, दामाद मुहम्मद सफदर और गृह मंत्री तलाल चौधरी समेत कई नेताओं ने जारानवाला की रैली में कोर्ट पर निशाना साधा था। ये लोग शरीफ को प्रधानमंत्री पद के अयोग्य ठहराए जाने से खफा थे।

मालूम हो कि शरीफ पर भ्रष्टाचार के तीन मुकदमे चल रहे हैं। दोषी पाए जाने पर उन्हें जेल हो सकती है। बीते शुक्रवार को कोर्ट ने शरीफ को आजीवन सार्वजनिक पद ग्रहण करने के अयोग्य ठहरा दिया था। इस फैसले के बाद भी न्यायपालिका विरोधी नारे लगे थे।

जज हैं असली शेर-

कोर्ट के खिलाफ दिए जा रहे बयानों पर संयम बनाए रखने के लिए पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश साकिब निसार ने जजों की तारीफ की है। निसार ने नवाज शरीफ की चुटकी लेते हुए जजों को असली शेर बताया। दरअसल शरीफ को 'पंजाब के शेर' नाम से जाना जाता है। उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) का चुनाव चिह्न भी शेर है।