नई दिल्ली। प्रशांत महासागर के दक्षिणी तट पर बसा न्यूजीलैंड बहुत ही शांतिप्रिय देश है। छोटे मोटे अपराध को छोड़ दें तो यहां कोई बड़ा अपराध नहीं होता। भारत से लगभग 12 हजार किलोमीटर दूर स्थित न्यूजीलैंड की अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक में कोई खास दखल भी नहीं है। लेकिन भारत के ज्यादातर लोग न्यूजीलैंड से अच्छी तरह परिचित हैं। इसकी बड़ी वजह क्रिकेट का खेल है। दुनिया की पांच शीर्ष टीमों में न्यूजीलैंड की टीम शुमार है।

द्वीपों के रूप में बसे न्यूजीलैंड की प्राकृतिक छटा भी निराली है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्म निर्माताओं से लेकर आम सैलानियों को अपनी ओर खींचता है।

लगभग 2.70 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले कई द्वीपों को मिलाकर यह देश बना है। इसके दो बड़े प्रमुख उत्तरी और दक्षिणी द्वीप हैं। उत्तरी द्वीप में यहां की जनसंख्या में से 40 लाख लोग रहते हैं जबकि उससे बड़े दक्षिणी द्वीप में 10 लाख लोग। राजधानी वेलिंगटन उत्तरी द्वीप में स्थित है, लेकिन इसके उत्तरी सिरे में सबसे बड़ा शहर ऑकलैंड है। यहां 95 फीसद लोग अंग्रेजी बोलते हैं, जबकि, यहां के मूल निवासियों की भाषा माओरी है। ईसाई बहुल न्यूजीलैंड में हिंदू, बौद्ध, मुस्लिम और अन्य धर्म के लोग भी हैं। हर किसी को अपने धर्म को मानने की आजादी है।

इतिहास छोटा, लेकिन वर्तमान से नहीं है अछूता

न्यूजीलैंड में 13वीं सदी से पहले के मानव अवशेषों के प्रमाण नहीं मिले हैं। यहां पहली बसाहट पोलिनेसियन लोगों, जो कि प्रशांत महासागर द्वीपों (ओसियाना) के मूल निवासी थे, ने 13वीं सदी में की थी। सैकड़ों सालों तक यहां धीरे-धीरे माओरी जनजाति ने अपनी संस्कृति विकसित की। 17वीं सदी में डच (नीदरलैंड) के लोगों ने सबसे पहले यहां कदम रखे, लेकिन 1769 में कैप्टन कुक के आने के बाद से यहां यूरोपीय लोगों की आवाजाही सही मायनों में बढ़ी। 1840 तक ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स के अधीन रहने के बाद न्यूजीलैंड एक स्वतंत्र ब्रिटिश उपनिवेश बन गया। जबकि 1852 में पहली सरकार बनी।

ब्रिटेन की तरह है शासन व्यवस्था

यहां संसदीय प्रणाली है, जो भारत और ब्रिटेन की ही तरह काम करती है। न्यूजीलैंड 1893 में महिलाओं को वोट का अधिकार देने वाला दुनिया का पहला देश बना था। 1947 के बाद न्यूजीलैंड में ब्रिटेन की संसद का प्रभाव खत्म हो गया, लेकिन न्यूजीलैंड में संवैधानिक राजशाही का शासन हो गया। इसकी प्रमुख ब्रिटेन की महारानी ही रहीं जिनके पास वैसे ही अधिकार थे जैसे इंग्लैंड में।

लिखित संविधान नहीं

न्यूजीलैंड का कोई लिखित संविधान नहीं है। इंग्लैंड की ही तरह न्यूजीलैंड में सबसे शक्तिशाली यहां की संसद है जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होता है। यहां महारानी का प्रतिनिधित्व गवर्नर जनरल करता है जिसे प्रधानमंत्री की सलाह पर महारानी नियुक्त करती हैं।

आर्थिक उन्नति ने बनाया विकसित देश

न्यूजीलैंड ने द्वितीय विश्र्व युद्ध के बाद आधुनिक बाजार अर्थव्यवस्था के दम पर तेजी से आर्थिक विकास किया है। यहां की करेंसी न्यूजीलैंड डॉलर है जिसे कीवी डॉलर है। यहां की भूतापीय ऊर्जा देश की 22 फीसद ऊर्जा की आपूर्ति करती है। इसके अलावा पनबिजली के स्त्रोत भी काफी मात्रा में हैं, जिनसे करीब 18 फीसद मांग पूरी होती है।

विदेशी व्यापार में आधारित अर्थव्यवस्था

यहां की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्री व्यापार पर ज्यादा निर्भर है जिसमें कृषि उत्पाद जैसे फल सब्जी, गेंहू, डेयरी उत्पाद शामिल हैं। वहीं पर्यटन, बैंकिंग और बीमा, कपड़ा, उत्खनन जैसे उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

भारत से बेहतर संबंध

न्यूजीलैंड में दो लाख से ज्यादा भारतीय और भारतीय मूल के लोग रहते हैं। 30 हजार से ज्यादा भारतीय छात्र उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं। दोनों देशों की सेनाओं ने कोसोवो और सूडान में संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में संयुक्त भागीदारी की थी। दोनों देश कॉमनवेल्थ समूह का हिस्सा होने पर काफी कुछ साझा करते हैं। क्रिकेट की वजह से भी दोनों देशों के बीच काफी सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी होता है।