इस्लामाबाद। मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड और भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद पिछले रास्ते से सत्ता पाने के सपने को पाक चुनाव आयोग के एक फैसले से तगड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान चुनाव आयोग ने मिलि मुस्लीम लीग को मान्यता देने से साफ इन्कार कर दिया है। आंतरिक (गृह) मंत्रालय की रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग ने यह फैसला लिया है।

मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मिलि मुस्लिम लीग (एमएमएल), प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा की विचारधारा से इत्तेफाक रखता है। गृह मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट का आधार इंटेलीजेंस एजेंसियों से मिली जानकारियों को बनाया है।

वहीं, एमएमएल के वकील ने कहा कि संघीय सरकार किसी भी राजनैतिक दल को मान्यता देने से इन्कार नहीं कर सकती। उन्होंने कहा- ये कोई नहीं बता सकता कि भविष्य में कोई राजनैतिक दल किसी प्रतिबंधित संगठन से संबंधित होगा या नहीं। उन्होंने कहा कि एमएमएल के नेता सैफुल्लाह खालिद का हाफिज सईद या जमात-उद-दावा से कोई लिंक नहीं है।

बता दें कि इससे पहले अब्दुल गफ्फार के नेतृत्व में सुनवाई कर रही चुनाव आयोग की चार सदस्यीय बेंच ने आंतरिक मंत्रालय से पार्टी के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। एमएमएल को लेकर पिछले एक साल से सुनवाई चल रही है।

हाफिज सईद खोज रहा था सत्ता का रास्ता -

इससे पहले हर ओर चर्चा थी कि आतंकी हाफिज सईद राजनीति के रास्ते सत्ता में आना चाहता है, ताकि वह पाकिस्तान के सर्वोच्च पद तक पहुंच सके। बताया जाता है कि हाफिज सईद एमएमएल के जरिये अपने इस सपने को पूरा करने की सोच रहा था।