बहराइच। नेपाल सीमा पर बसे भारतीय गांवों में ड्रैगन का नेटवर्क फैला है। यहां नेपाली सिमकार्ड का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। भारतीय क्षेत्र में 10 किलोमीटर की परिधि में नेपाली नंबरों की घंटी बज रही है। करीब पांच हजार भारतीय नेपाली सिमकार्ड का प्रयोग कर रहे हैं। इनमें से कई सिमकार्ड चीन की कंपनियों के हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस बात से बेखबर हैं।

सीमा सुरक्षा के दृष्टिगत यह प्रावधान है कि नोमेंस लैंड यानी मानव विहीन पट्टी से 500 मीटर पहले तक मोबाइल सिग्नल नहीं होने चाहिए। इसलिए दूरसंचार कंपनियों को सीमा से 10 किलोमीटर के भीतर बीटीएस लगाने पर रोक है। भारतीय क्षेत्र में इसका पूरा पालन हो रहा है, लेकिन नेपाली क्षेत्र में नियम को ताक पर रख दिया गया है। इसीलिए मोतीपुर, मिहीपुरवा, रुपईडीहा, बाबागंज, नवाबगंज और श्रावस्ती के मल्हीपुर तक नेपाली संचार एजेंसियों का नेटवर्क पकड़ रहे हैं।

नेपाल में सीमा पर बसे बांके, जैसपुर, निकट कस्टम कार्यालय समेत सीमा के समानांतर बड़ी संख्या में बीटीएस टॉवर लगाए गए हैं। ये एनसेल (चीन), नमस्ते व स्काई (नेपाल) के हैं। सीमा के आसपास इनका नेटवर्क बेहतर होने से भारतीय क्षेत्र में आम नागरिक ही नहीं पुलिस के जवान भी नेपाली सिमकार्ड इस्तेमाल करते हैं। यह हाल तब है जब भारत-नेपाल सीमा बेहद संवेदनशील है। पाक के करांची का रहने वाला आतंकी मशरूर यहां से ही पकड़ा गया था। सीमा की फोटो खींचते हुए तीन चीनी नागरिक भी गिरफ्तार किए गए थे।


अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवा से लैस कोई नेपाली सिम लेकर भारत में आता है तो उसकी बातचीत पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन फर्जी दस्तावेजों के सहारे नेपाली सिम लेकर सीमा पार इसका इस्तेमाल हो रहा है तो गलत है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। - रवींद्र सिंह, एएसपी, ग्रामीण

भारत-नेपाल सीमा पर नेपाली सिमकार्ड के प्रयोग के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। अगर शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी। - शैलेश कुमार, डिप्टी कमांडेंट एसएसबी 42वीं वाहिनी