कोलंबो। श्रीलंका में ईस्टर के दिन चर्च और होटलों पर हुए बम विस्फोट ने कई परिवारों को तबाह कर के रख दिया। हमले में 200 बच्चों ने अपना परिवार खो दिया और जिससे उनकी जिंदगी में परिवार शब्द एक यादों में खोकर सपना बनकर रह गया। कुछ बच्चे तो बिल्कुल अकेले रह गए हैं। कई परिवारों कीआजीविका छिन गई है।कोलंबो स्थित श्रीलंका रेडक्रॉस सोसायटी (एसएलआरसीएस) की एक रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित परिवारों का जीवन पटरी पर आने में बहुत मुश्किलें आएंगी।

श्रीलंका सरकार ने स्थानीय आतंकी संगठन नेशनल तौहीद जमात को इस हमले का जिम्मेदार बताया है। हमले में 500 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। उनमें से कुछ की हालात अभी भी बेहद गंभीर है। वह फिलहाल किसी भी तरह का काम करने में अक्षम हैं। एसएलआरसीएस की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे करीब 75 परिवार हैं जिनकी आजीविका इस हमले से बाधित हुई है। हमले में बचे लोग और प्रत्यक्षदर्शी इस समय मानसिक ट्रॉमा से भी गुजर रहे हैं।

एसएलआरसीएस ने कहा कि वह तनाव के साथ भय का सामना कर रहे हैं। उनके लिए हमले की याद को भुलाना आसान नहीं है। इसके चलते भविष्य में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें मनोवैज्ञानिक सहायता दिए जाने की जरूरत है।

अब भी हमले का खतरा श्रीलंका प्रशासन ने हमले में शामिल सभी आतंकियों के गिरफ्तार होने या मारे जाने का दावा किया है। लेकिन उन्होंने आइएस के आतंकी हमले के खतरे को लेकर चेतावनी भी दी है।