मल्‍टीमीडिया डेस्‍क। कंबोडिया के फोम दा टेंपल से सन 1880 में सातवीं शताब्‍दी में बनी भगवान हरिहर की मूर्ति का सिर चोरी हो गया था। हिंदू देवता की मूर्ति का सिर कुछ फ्रांसीसी शोधकर्ताओं ने चुरा लिया था।

अब 130 साल बाद मूर्ति का सिर वापस मिला है। हाल ही में कंबोडिया के नेशनल म्‍यूजियम में मूर्ति के सिर को धड़ से जोड़े जाने की रस्‍म को पूरा किया गया है।

कौन हैं हरिहर

हरिहर को निर्माण तथा विध्‍वंस का देवता माना जाता है। मान्‍यता है कि वो भगवान विष्‍णु और शिव का अवतार थे। यह मूर्ति पत्‍थर को तराशकर बनाई गई थी।

कहां से हुई थी चोरी

सातवी सदी में बनाई गई भगवान हरिहर की मूर्ति कंबोडिया के टेको प्रांत के दक्षिण में बने फोम दा टेंपल में रखी थी। फ्रांस से आए कुछ शोधकर्ताओं ने सन 1882 और 1883 के दरम्‍यान इस मूर्ति का सिर चुरा लिया था। बाद में यह सिर फ्रांस के गुमेट म्‍यूजियम में रखा गया था।

पिछले लगभग दो दशक से कंबोडिया की सरकार दुनिया के उन देशों से अपनी सांस्‍कृतिक विरासतों को वापस मांग रही है, जो किसी कारणवश देश से बाहर पहुंच गई थीं। कंबोडिया में मूर्ति के पूरा होने का जश्‍न मनाया जा रहा है। यहां की ख्‍मेर संस्‍कृति में इस री-यूनियन को समृद्धि का प्रतीक माना गया है।

गौरतलब है कि कंबोडिया में कई शताब्दियों तक हिंदू राजाओं ने शासन किया था। इसी दौरान यहां हिंदू मंदिर तथा देवी-देवताओं की स्‍थापना की गई थी। विश्‍व प्रसिद्ध अंगोरवाट मंदिर भी यहीं है।

हालांकि, वहां से भी कई वस्‍तुएं चोरी हो चुकी हैं। कालांतर में यहां बौद्ध धर्म का प्रभाव बढ़ गया था। उल्‍लेखनीय है कि कंबोडिया की 90 फीसदी आबादी बौद्ध धर्म मानती है।