सैन फ्रांसिस्को। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों के लिए पिछले दिनों कंपनी के रवैये पर अपने कर्मचारियों से माफी मांग कर कंपनी का उदार चेहरा दिखाने की कोशिश की है। साथ ही वादा किया है कि कंपनी गूगल के कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करने के लिए एक नई नीति लेकर आएगी। अब कुछ बदलाव किए जाएंगे ताकि कंपनी को एक सुरक्षित कार्यस्थल बनाया जा सके।

उल्लेखनीय है कि एक हफ्ते पहले ही यौन उत्पीड़न के आरोपित कुछ बड़े अफसरों को बचाने के आरोपों के बाद भारत समेत विश्व भर में गूगल के 20 हजार से अधिक कर्मचारियों ने अपने दफ्तरों से वॉकआउट कर सड़कों पर प्रदर्शन किया था।

न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद गूगल कंपनी में भूचाल आ गया था। रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया था कि गूगल किस तरह से यौन उत्पीड़न के आरोपितों को बचा रही है और करोड़ों डॉलर के पैकेज दे रही है।

भारत में भी हैदराबाद, गुरुग्राम और मुंबई के दफ्तरों से भी करीब 150 गूगल कर्मचारियों ने वॉक आउट किया था। विगत गुरुवार को अपने कर्मचारियों को मेमो जारी करते हुए भारतीय मूल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि हम मानते हैं कि पिछले दिनों हमने सबकुछ सही नहीं किया। और हमें इस बात का बेहद खेद है। यह स्पष्ट है कि हम कुछ बदलाव करना चाहते हैं। पिचाई ने गूगल कर्मचारियों की मांगों पर कहा कि इस क्षेत्र में हमें लगातार प्रगति करने की जरूरत है। हम ऐसा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम इन चिंताओं को दूर करने में और पारदर्शिता बरतेंगे। इन मुद्दों को उठाने वाले लोगों के प्रति हम अधिक संवेदनशीलता दिखाएंगे और उनका समर्थन करेंगे। साथ ही हम एक प्रतिनिधि, भागीदार और सम्मानजनक कार्यस्थल के रूप में अपनी प्रतिबद्धता को दोगुना कर देंगे।

सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक गूगल के नेतृत्व ने पिचाई के मेमो के बाद कर्मचारियों के साथ बैठकें भी की हैं। हालांकि उन्होंने अभी भी अल्फाबेट के बोर्ड में किसी कर्मचारी प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया है। और ना ही चीफ डायवर्स्टी अफसर को सीधे तौर पर सीईओ से संपर्क करने का अधिकार नहीं दिया है।

गूगल ने यौन उत्पीड़न के मामलों की जांच में और पारदर्शिता बरतने के वादे के साथ अपनी सालाना जांच रिपोर्ट में उसके नतीजे जाहिर करने की बात कही है। प्रदर्शन के आयोजकों ने गूगल से मांग की है कि वह यौन उत्पीड़न के आरोपों पर बलपूर्वक मध्यस्थता कराने की अपनी नीति को पूरी तरह से छोड़ दें। चूंकि इसके चलते कर्मचारी मामले को कोर्ट में नहीं ले जा पाते हैं। और अधिकांशतः पीड़ितों की बात को आलोचनाओं के बीच दबा दिया जाता है। लेकिन अब पिचाई ने मेमो में कहा कि गूगल ने कभी भी ऐसे मामलों में गोपनीयता बरतने की कोशिश नहीं की है। लेकिन अब उत्पीड़न और हमले के पीड़ितों को मध्यस्थता प्रक्रिया चुनने या न चुनने का विकल्प दिया जाएगा।

गूगल ने एक लिखित दस्तावेज में यह भी कहा कि है कि कांट्रैक्ट की नियमित रूप से समीक्षा होगी। साथ ही अस्थाई कर्मचारियों की नियोक्ता कंपनियों को भी कर्मचारियों की शिकायतों को उचित तरीके से देखना होगा।