इस्लामाबाद : फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की बैठक से पहले आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में पाकिस्तान के पास कोई खास उपलब्धि नहीं है। एफएटीएफ की ब्लैक लिस्ट के कगार पर बैठा पाकिस्तान आतंकी संगठनों के आर्थिक स्त्रोतों और उनकी संपत्तियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर पाया है। यह जानकारी पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने दी है।

एफएटीएफ आतंकियों और ड्रग तस्करों के आर्थिक स्त्रोतों पर नजर रखने वाला अंतरराष्ट्रीय संगठन है। वह आतंकियों और अपराधियों को धन और आश्रय देने वाले देशों पर नजर रखता है और उनके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां करता है। इन टिप्पणियों के आधार पर आतंकियों के मददगार देशों को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आर्थिक मदद, कर्ज इत्यादि मिलने से कठिनाई होती है। ऐसे देशों में पूंजी निवेश से भी बहुराष्ट्रीय कंपनियां झिझकती हैं।

पाकिस्तान को कई बार चेतावनी देने के बाद एफएटीएफ ने उसे ग्रे लिस्ट में डाला है। कहा है कि अगर उसने आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है। ब्लैक लिस्ट में डाले जाने से आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मदद मिलने का रास्ता बाधित हो जाएगा। एफएटीएफ के विशेषज्ञों का दल जनवरी 2019 के प्रथम सप्ताह में पाकिस्तान आकर उसके आतंकियों और ड्रग तस्करों के खिलाफ उठाए गए कदमों को देखेगा। वह जून में पाकिस्तान को लेकर जताई गई चिंता और उससे की गई अपेक्षाओं पर हुए कार्यों की समीक्षा करेगा।

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई न हो पाने का सबसे बड़ा कारण पाकिस्तान के भीतर की टकराव वाली स्थितियां हैं। इसी के चलते आतंकी संगठन ठहराई गई तंजीमों की संपत्तियों की जब्ती नहीं हो पा रही है। साथ ही एफएटीएफ से कानूनी बिंदुओं पर वार्ता में पाकिस्तानी अधिकारी सक्षम नहीं हैं। वित्त मंत्री असद उमर ने एफएटीएफ की अपेक्षाओं वाले 27 बिंदुओं पर कई बैठकें कीं लेकिन बमुश्किल से दस पर काम शुरू हो सका।