लंदन। पोर्ट ग्लासगो के शहर में क्लेड नदी पर एक स्थान को आधिकारिक रूप से भारतीय प्रथा के लिए नामित कर दिया गया है। हिंदू संप्रदाय के लोग अंतिम संस्कार के बाद अस्थि विसर्जन के लिए इस जगह पर राख नदी में प्रवाहित कर सकते हैं। स्कॉटलैंड में ऐसा पहली बार किया गया है और इसी के साथ ही क्लेड नदी हिंदुओं के लिए गंगा के समान हो गई है।

भारतीय समुदाय के साथ बातचीत के बाद स्कॉटलैंड में इन्वर्टिसली काउंसिल पहली ऐसी लोकल अथॉरिटी बन गई है, जिसने हिंदुओं के इस अनुष्ठान को मान्यता दी है। ग्लासगो से 35 किमी दूर पोर्ट ग्लासगो में नेवार्क के स्लिपवे पर रेलिंग स्थापित की है। काउंसिल के एक प्रवक्ता ने कहा कि हम कुछ समय से सिख और भारतीय समुदाय के साथ बातचीत कर रहे थे, ताकि क्लेड नदी पर अस्थि विसर्जन के लिए उपयुक्त स्थान की पहचान की जा सके।

जाहिर है यह एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है और हम मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। समूह ने सहायता के लिए हर स्थानीय प्राधिकरण से संपर्क किया है और हम आशा करते हैं कि हमने जो सहायता प्रदान की है, वह सम्मान के साथ अस्थि विसर्जन करने में मदद करेगी। काउंसिल ने सुरक्षा उपाय के रूप में साइट पर रेलिंग लगाई है। हालांकि, इससे स्थानीय नाव मालिकों में कुछ नाराजगी जाहिर की है, जिसमें नेवार्क बोट क्लब के सदस्य भी शामिल थे। दरअसल, उन्हें अपने क्राफ्ट को लॉन्च करने में परेशानी आ रही थी।

प्रवक्ता ने कहा कि हमने अब इस जगह को तय कर दिया है। पोर्ट ग्लासगो पार्षद डेविड विल्सन ने कहा कि यह परिषद का मानवतावादी तरीके से और सुरक्षा के दृष्टिकोण से की गई कार्रवाई का एक अच्छा उदाहरण है। पर्यावरण एजेंसी के एक प्रवक्ता ने कहा कि अस्थियों की राख से पानी की गुणवत्ता पर बहुत कम असर पड़ता है, लेकिन अन्य वस्तुओं को पानी में नहीं डालना चाहिए। इसमें धातु या प्लास्टिक हो सकता है, जो कूड़े का कारण बन सकता है या वन्यजीवों को नुकसान पहुंचा सकता है।