नई दिल्ली। भारत के ओडिशा स्थित तटीय इलाकों में चक्रवाती तूफान "तितली" ने तबाही मचाई है। कहर बरसाने वाला ऐसा तूफान देश में पहली बार नहीं आया है। इसके पहले भी हुदहुद, फैलिन एवं कोरिंगा जैसे तूफान भारी तबाही मचा चुके हैं। देश में 1839 में आंध्र प्रदेश में "कोरिंगा" नामक तूफान ने भारी तबाही मचाई थी, जिसमें करीब तीन लाख लोगों की मौत हुई थी।

बहरहाल, इस बार तितली की तबाही से देश के कई राज्य संकट में हैं। ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड सहित 13 राज्य इसकी चपेट में हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किसी तूफान का नाम कैसे दिया जाता है और देश में किन तूफानों ने इससे पहले तबाही मचाई है।

पाक मौसम वैज्ञानिकों ने नाम दिया तितली

हिंद महासागर क्षेत्र के आठ देशों ने भारत की पहल पर चक्रवात को नाम देने की व्यवस्था साल 2000 में शुरू हुई। इस समूह में भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार, मालदीव, श्रीलंका, ओमान और थाइलैंड शामिल हैं। इन देशों के मौसम वैज्ञानिकों ने 64 नामों की सूची बनाई। हर देश की तरफ से आठ नाम थे। इसके बाद इन आठों देशों को अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों के हिसाब से रखा गया। जिससे बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड का क्रम बना।

हर देश ने दिए आठ नाम

फिर इन देशों के नीचे इनके दिए 8 नामों को लगा दिया गया, जिससे कुल 64 नाम हो गए थे। 'तितली' इनमें से 54वां है और अभी आगे के 10 तूफानों के नाम और बचे हैं। इस बार नामकरण की बारी पाकिस्तान की थी। पाकिस्तान की ओर "तितली" नाम प्रस्तावित था। इसलिए मौजूदा चक्रवात का नाम "तितली" रखा गया।

समुद्री तूफान को अलग-अलग दिए नाम

अटलांटिक महासागर के क्षेत्र में आने वाले चक्रवातीय तूफान को 'हरिकेन' कहते हैं। वहीं, चक्रवातीय तूफान प्रशांत महासागर के क्षेत्र में आता है, तो उसे 'टाइफून' कहा जाता है। यदि चक्रवातीय तूफान हिंद महासागर के क्षेत्र में आता है, तो इसे 'साइक्लोन' कहा जाता है। दरअसल, साइक्लोन, हरिकेन और टाइफून यह बताते हैं कि चक्रवाती तूफान किस क्षेत्र में आ रहा है।

तबाही मचाने वाले नाम बदल दिए जाते हैं

अप्रत्याशित तबाही लाने वाले तूफान के नाम बदल दिए जाते हैं, ताकि लोग विनाश की पीड़ा को उसके नाम से महसूस न करें। उदाहरण के लिए साल 2005 में कहर बरपाने वाले तूफान 'कैटरीना', 'रीटा' और 'विलमा' नाम को अब कभी इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।