कैरिटा। इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने के कारण आई सुनामी से 222 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों अन्य घायल हो गए। इंडोनेशिया की सुंडा जलसंधि के तट पर स्थानीय समयानुसार शनिवार रात 9ः30 बजे सुनामी ने दस्तक दी।

यह सुनामी क्रैकाटोआ की संतान कहे जाने वाले एक ज्वालामुखी में विस्फोट के कारण आई।

अधिकारियों ने बताया कि ज्वालामुखी विस्फोट के कारण सुनामी आने की घटनाएं बहुत कम होती हैं।

भूकंप के कारण आने वाली सुनामी से इतर इस तरह की सुनामी में लोगों को सतर्क करने का कोई मौका नहीं मिलता है। राष्ट्रीय आपदा एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो नुग्रोहो ने बताया कि ज्वालामुखी फटने के कारण समुद्र के नीचे सतह में हलचल हुई।

पूर्णिमा की रात होने के कारण उठ रही ऊंची लहरों के साथ मिलकर यह हलचल बड़ी तबाही का कारण बन गई। राहत और बचाव कार्य में लगे अधिकारियों ने बताया कि आपदा में 843 लोग घायल हो गए हैं और 28 लोग लापता हैं।

तट के आसपास बनी इमारतें ध्वस्त हो गईं। पेड़ और बिजली के खंबे उखड़ गए। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस की कैथी मूलर ने कहा कि आपदा में मरने वालों की संख्या में इजाफा हो सकता है।

नुग्रोहो ने भी कहा कि अभी आपदा पीड़ितों की संख्या का सही आकलन संभव नहीं है। जैसे-जैसे राहत और बचाव का काम आगे बढ़ेगा, स्थिति का उतना ही सही अनुमान लगाना संभव होगा।

बह गए कंसर्ट में जुटे लोग

इंडोनेशिया में जिस समय सुनामी आई, ठीक उसी समय तट के किनारे एक म्यूजिक कंसर्ट आयोजित किया जा रहा था। शो के रंग में डूबे लोग नाच-गाने में खोये थे कि अचानक ऊंची लहरों ने सबकुछ तहस-नहस कर दिया। प्रदर्शन कर रहे कलाकार स्टेज समेत बह गए। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है।

कंसर्ट में रॉक बैंड "सेवनटीन" के सदस्य प्रदर्शन कर रहे थे। इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो के मुताबिक, रॉक बैंड से जुड़े दो लोगों की मौत हो गई। तीन अन्य सदस्य लापता भी बताए जा रहे हैं। हादसे में बचे बैंड के सदस्य जैक ने बताया कि कंसर्ट का आयोजन सरकारी बिजली कंपनी पीएलएन की तरफ से किया गया था।

अधिकारियों का कहना है कि अनक के फटने की वजह से समुद्र के अंदर लैंडस्लाइड हुआ और लहरों में असामान्य परिवर्तन आया, जिसने सुनामी का रूप ले लिया। बता दें कि रिंग ऑफ फायर में स्थित होने के कारण इंडोनेशिया में दुनिया में सबसे अधिक भूकंप और सुनामी आते हैं। इसी साल जुलाई में इंडोनेशिया में एक हफ्ते के अंतराल में दो भूकंप के झटके आए थे। लोम्बोक में 7 और बाली में 6.4 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था। इनमें सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी।

जावा के दक्षिणी छोर और दक्षिणी सुमात्रा के तटों पर आई सुनामी की लहरों से दर्जनों इमारतें धराशाई हो गई हैं। सुनामी का सबसे ज्यादा असर सुमात्रा के दक्षिणी लामपुंग और जावा के सेरांग और पांदेलांग इलाके में पड़ा। प्रत्‍यक्षदर्शियों के मुताबिक समुद्र से 15 से 20 मीटर ऊंची लहरें उठती देखी गई हैं।

फिलहाल द्वीप पर राहत और बचाव का कार्य शुरू कर दिया गया है। बताते चलें कि तीन महीने पहले सितंबर में इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप स्थित पालु और दोंगला शहर में भूकंप के बाद सुनामी आने से 832 लोगों की मौत हो गई थी। हजारों लोग घायल भी हुए थे। कुल 6 लाख की आबादी वाले इन दोनों शहरों में आपदा के तीन महीने बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं।

2004 में सुनामी ने ली थी 2 लाख लोगों की जान

इंडोनेशिया के सुमात्रा में 9.3 तीव्रता का भूकंप साल 2004 में आया था। इसके बाद हिंद महासागर के तटीय इलाकों वाले देश सुनामी की चपेट में आ गए थे। तब भारत समेत 14 देश सुनामी से प्रभावित हुए थे। दुनियाभर में 2.20 लाख लोगों की जान गई। इनमें 1.68 लाख लोग इंडोनेशिया के थे।