मल्टीमीडिया डेस्क। माइक्रोसॉफ्ट विंडोज7, एक्सपी और इसके पुराने वेरिएंट के उपयोगकर्ताओं को तुरंत अपने ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट करने की चेतावनी दे रहा है। दरअसल, WannaCry जैसे मैलवेयर का फायदा उठाने वाले एक और खतरे की कंपनी ने पहचान की है। माइक्रोसॉफ्ट ने इस दोष को ठीक करने के लिए पैच जारी किए हैं। मगर, इसके लिए यूजर्स को अपने सिस्टम को अपग्रेड करना होगा और यह जटिल हो सकता है।

अगर यूजर्स ने अपने विंडोज सॉफ्टवेयर को अपडेट किया होता, तो दुनिया भर में दो लाख से अधिक कंप्यूटरों को प्रभावित करने वाले WannaCry रैंसमवेयर से भी बचा जा सकता था। इस वायरस की वजह से 8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था। मगर, इसके बावजूद कुछ ही लोगों ने अपने विंडोज ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर को अपडेट किया था। बताते चलें कि विंडोज के तीन नए वर्जन आने के बावजूद अभी भी दुनियाभर में 36 फीसद कंप्यूटर विंडोज7 पर और 3.5 फीसद एक्सपी सॉफ्टवेयर पर चल रहे हैं।

इसके बाद के वर्जन का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स भी अक्सर नियमित सिक्योरिटी पैच इंस्टॉल नहीं करते हैं, जिन्हें फ्लॉ (दोष) को ठीक करने के लिए जारी किया गया। यह ढुलमुल रवैया पर्सनल कंप्यूटर्स तक ही सीमित नहीं है, कंपनियों और वित्तीय संस्थान भी अपने सिस्टम को अपडेट करने के मामले में ढीले हैं। अगर भारत की बात करें, तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी बैंकों के लिए एक डिक्टेट जारी करना पड़ा था कि वे अपने एटीएम सॉफ्टवेयर को विंडोज एक्सपी से अपग्रेड कर लें क्योंकि माइक्रोसॉफ्ट अब उसे सपोर्ट नहीं करता है।

हमारे कंप्यूटर में चिंताजनक दोष सॉफ्टवेयर तक ही सीमित नहीं हैं। शोधकर्ताओं के एक समूह के साथ काम करने वाले इंटेल ग्रुप ने अपने माइक्रोचिप में भी एक दोष पाया है, जो हैकर्स को पर छिपकर यूजर्स की सेंसिटिव इंफॉर्मेशन को चुराने की इजाजत दे सकता है। यह भी सुरक्षा चिंता का एक बड़ा विषय है, जो लगभग सभी पर्सनल कंप्यूटर्स में लगा होता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि साल 2011 के बाद से जारी किए गए लगभग सभी सीपीयू में इंटेल का ताजा दोष मौजूद हो सकता है। हालांकि, इंटेल ने दोष को ठीक करने के लिए अपडेट जारी किए हैं।