- ट्रंप प्रशासन ने 6,287 करोड़ रुपए के रक्षा सौदे को दी मंजूरी।

- क्षेत्रीय खतरों से रक्षा के लिए भारत की बढ़ेगी मारक क्षमता।

वॉशिंगटन। ट्रंप प्रशासन ने भारत को छह एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर बेचने के लिए 93 करोड़ डॉलर (करीब 6,287 करोड़ रुपए) के करार को मंजूरी दे दी है। अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने कहा है कि इस हेलिकॉप्टर से भारत की घरेलू और क्षेत्रीय खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ जाएगी।

पेंटागन की डिफेंस सिक्योरिटी को-ऑपरेशन एजेंसी ने इस संबंध में विदेश विभाग द्वारा लिए गए फैसले से अमेरिकी संसद को अवगत करा दिया है। अगर किसी सांसद ने इसका विरोध नहीं किया तो इस बिक्री पर जल्द ही संसद की मुहर भी लग जाएगी। इन लड़ाकू हेलिकॉप्टरों के अलावा रक्षा सौदे में फायर कंट्रोल रडार, हेलफायर लांगबो मिसाइल, स्टिंगर ब्लॉक आई-92एच मिसाइल, नाइट विजन सेंसर और इनर्शल नेविगेशन सिस्टम भी शामिल हैं।

पेंटागन ने कहा, "एएच-64ई से भारत की रक्षा क्षमता बढ़ जाएगी और उसके सशस्त्र बलों का आधुनिकरण होगा। इस प्रस्तावित बिक्री से क्षेत्र में बुनियादी सैन्य संतुलन में कोई बदलाव नहीं आएगा।"

भारत-अमेरिका रक्षा कारोबार बढ़ाभारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय रक्षा कारोबार 2008 से करीब शून्य से बढ़कर 15 अरब डॉलर (एक लाख करोड़ रुपए) के स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने साल 2016 में भारत को बड़े रक्षा साझीदार का दर्जा दिया था।

अमेरिका ने मुहैया कराए ये हथियार -

अमेरिका ने हाल के वर्षों में भारत को परिवहन विमान सी-17, 155 एमएम हॉवित्जर तोप, यूजीएम-84एल हारपून मिसाइल, सी-130जे सुपर हरक्युलस विमान के अलावा केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर उपकरण मुहैया कराए हैं।

अपाचे की है ये खासियत -

- दो टर्बोशाफ्ट इंजन वाले एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर में दो पायलटों के बैठने की सुविधा है।

- हेलिकॉप्टर के अगले हिस्से में नाइट विजन सेंसर लगे हैं, जिससे यह रात में भी मार कर सकता है।

- यह बेहद कम ऊंचाई पर उड़कर हवाई हमले के साथ ही जमीनी हमले करने में भी सक्षम है।

- इसमें उन्नत लांगबो रडार भी लगा है जिससे नौसेना के हमले में इजाफा हो सकेगा।

- अपाचे में एजीएम-114 हेलीफायर मिसाइल और हाइड्रा 70 रॉकेट पॉड्स भी लगे हैं।

- ये हेलिकॉप्टर अमेरिका के अलावा, ब्रिटेन, इसराइल, नीदरलैंड्स, सऊदी अरब और मिस्र के पास भी हैं।