न्यूयॉर्क। पानी की किल्लत दुनियाभर में बढ़ती जा रही है। आलम यह है कि फिलहाल दुनियाभर में 2.2 अरब लोगों को पीने का साफ पानी भी नहीं मिल रहा है। वहीं, 4.2 अरब लोगों को सुरक्षित रूप से प्रबंधित स्वच्छता सेवाएं (शौचालय की सुविधा) भी नहीं मिल रही हैं। इसके अलावा दुनियाभर में करीब तीन अरब लोगों को बुनियादी हाथ धोने की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनाइटेड नेशन्स चिल्ड्रेन्स फंड की नई रिपोर्ट में दी गई है।

'प्रोग्रेस ऑन ड्रिंकिंग वॉटर, सैनिटेशन एंड हाईजीन, 2000-2017 : स्पेशल फोकस ऑन इनइक्वेलिटीज' नाम की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2000 के बाद से 1.8 अरब लोगों को बुनियादी पेयजल सेवा मिली है। मगर, लोगों तक पानी की पहुंच, उपलब्धता और इन सेवाओं की गुणवत्ता में भारी असमानताएं हैं।

यूनिसेफ की एसोसिएट डायरेक्टर ऑफ वॉटर, सैनिटेशन एंड हाईजीन केली एन नायलर ने कहा कि सिर्फ पानी की पहुंच पर्याप्त नहीं है। यदि पानी साफ नहीं है या बहुत दूर है, तो यह पीने के लिए सुरक्षित नहीं है। यदि शौचालय का उपयोग असुरक्षित या सीमित है, तो हम दुनिया के बच्चों के लिए काम नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि गरीब और ग्रामीण समुदायों में बच्चों और उनके परिवारों के सबसे पीछे छूट जाने का खतरा है। नाइलर ने दुनिया भर की सरकारों से अपने समुदायों में निवेश करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यदि हम इन आर्थिक और भौगोलिक विभाजन को पाटने जा रहे हैं, तो इस आवश्यक मानवाधिकार को वितरित कर सकेंगे।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि खुले में शौच करने वाली आबादी का हिस्सा सदी के अंत के बाद 21 फीसद से घटकर 9 फीसद हो गया है। हर साल 5 साल से कम उम्र के लगभग 2.97 लाख बच्चे अपर्याप्त पानी, स्वच्छता और स्वच्छता सेवाओं की कमी के चलते दस्त से मर जाते हैं। स्वच्छता की खराब हालत और दूषित पानी से हैजा, पेचिस, हेपेटाइटिस ए और टाइफाइड जैसी बीमारियों के फैलने में मदद मिलती है।