नई दिल्ली। सीरिया पर अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की तरफ से किए गए ताजा हमले के बाद वैश्विक हालात में बदलाव के मद्देनजर भारत ने चिंता जताते हुए सधी प्रतिक्रिया जताई है। भारत ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने का आह्वान किया है।

सीरिया के अपने ही नागरिकों पर रासायनिक हमला करने के मामले में भारत का कहना है कि इसकी पूरी जांच संबंधित अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से करवाई जानी चाहिए लेकिन फिलहाल सभी पक्षों को धैर्य दिखाना चाहिए ताकि सीरिया के नागरिकों की मुसीबत और न बढ़े।

भारत ने पूरे मामले पर गंभीर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से कहा है कि वे संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में बातचीत करके मामले का समाधान करें। सीरिया पर हुए ताजा हमले को लेकर भारत का लहजा चीन की तरह तल्ख तो नहीं है लेकिन भारत ने यह जाहिर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है कि वह पूरे मामले में तटस्थ रहेगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा है कि सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मामला और न बिगड़े। जानकारों का कहना है कि भारत सीरिया पर शनिवार को हुए हमले के बाद रुस की तरफ से जवाबी प्रतिक्रिया जताने को लेकर ज्यादा चिंतित है। रूस के विदेश मंत्री ने देर शाम जिस तरह से प्रेस कांफ्रेंस करके अमेरिका व उसके मित्र राष्ट्रों के खिलाफ तल्ख भाषा का प्रयोग किया है उससे हालात के बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

आर्थिक अनिश्चितता की चिंता-

सरकारी सूत्रों का कहना है कि सीरिया पर शनिवार को हुए हमले ने साबित कर दिया है कि वैश्विक कूटनीति में स्थिरता नहीं है। पहले ब्रिटेन में रूस के पूर्व जासूस को जहर देने के मामले पर जिस तरह से अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय देशों ने रूस के खिलाफ कदम उठाए थे और अब सीरिया पर रूस का विरोध करते हुए हमला करने से साफ है कि आगे हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं। इसका भारत पर आर्थिक असर ज्यादा पड़ेगा।

सबसे पहले तो इससे कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कयास लगाए जा रहे हैं। यह देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डालेगा। आम आदमी पर महंगाई का बोझ पड़ेगा। दूसरा असर यह होगा कि इससे शेयर बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन सकता है। यह घरेलू अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश पर पानी फेर सकता है।

भारत पर दूसरा असर रणनीतिक दृष्टिकोण से भी पड़ सकता है। भारत के अमेरिका के साथ बेहद अच्छे संबंध है लेकिन भारत अपनी 70 फीसद रक्षा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर है। ऐसे में उसके लिए दोनों देशों के बीच तालमेल बिठाना खासी चुनौती साबित हो सकती है।