इस्लामाबाद। पाकिस्तान सरकार ने मुंबई हमले के गुनहगार हाफिज सईद के आतंकी संगठन जमात-उद-दावा और हक्‍कानी नेटवर्क पर प्रतिबंध लगा दिया है। पाकिस्तान की मीडिया से मिल रही खबरों को अगर सही माना जाए तो पाकिस्तान सरकार 12 संगठनों पर पाबंदी लगाने जा रही है। हक्कानी और जमात-उद-दावा के अलावा हरकत-उल-मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन भी हैं, जो कश्मीर में काफी सक्रिय हैं।

इससे पहले सूत्रों के हवाले से खबर मिली थी कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार प्रतिबंध लगाने का फैसला कर चुकी है, जिसका एलान जल्द ही किया जाएगा। शरीफ सरकार का यह फैसला अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी की यात्रा के ठीक बाद लिया गया है। माना जा रहा है कि अमेरिका के कड़े शब्दों में चेतावनी देने के बाद यह फैसला लिया गया है।

72 प्रतिबंधित संगठन हैं पाक में

पाकिस्तान में अब प्रतिबंधित संगठनों की संख्या 72 तक पहुंच चुकी है। फिलहाल 23 प्रतिबंधित संगठन छद्म नामों से सक्रिय हैं। अमेरिका द्वारा तहरीक-ए तालिबान के सरगना मुल्ला फजलुल्ला को अंतरराष्ट्रीय आतंकियों की श्रेणी में रखने के बाद पाकिस्तान सरकार, विपक्षी दल और सैन्य नेतृत्व ने साझा फैसले में इन आतंकी संगठनों को प्रतिबंधित करने का फैसला किया। यह निर्णय आतंक के खिलाफ राष्ट्रीय कार्रवाई योजना के तहत लिया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार यह पाकिस्तान की सुरक्षा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव है। उनका मानना है कि अमेरिका, भारत और अफगानिस्तान निश्चत तौर पर इस निर्णय का स्वागत करेंगे। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी जमात-उद दावा को लश्कर का मुखौटा संगठन मान चुकी है। यही वजह है कि यूएन और अमेरिका इस संगठन के कई नेताओं पर प्रतिबंध लगा चुका है।

2008 में बना था हक्‍कानी नेटवर्क

जलालुद्दीन हक्कानी द्वारा स्थापित आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क को वर्ष 2008 में काबुल स्थित भारतीय दूतावास और वर्ष 2011 में अमेरिका के दूतावास पर हमले का जिम्मेदार माना जाता है। इसके अलावा इस नेटवर्क का कई और बड़े हमलों में हाथ रहा है।

अमेरिका सितंबर, 2012 में ही हक्कानी नेटवर्क को आतंकी संगठन की सूची में डाल दिया था। ताजा सूची में हरकत-उल मुजाहिदीन, फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (जमात से जुड़ा संगठन), उम्माह तामिर-ए-नउ, हाजी खैरुल्ला हाजी सत्ता मनी एक्सचेंज, राहत लिमिटेड, रोशन मनी एक्सचेंज, अल अख्तर ट्रस्ट, अल राशिद ट्रस्ट आदि के नाम शामिल हैं।

कई आतंकियों को दी गई फांसी

जमात-उद दावा प्रवक्ता आसिफ खुर्शीद ने कहा, "जमात विशुद्ध रूप से एक कल्याणकारी और चैरिटी संस्था है। यह कभी भी बुरे कामों में शामिल नहीं रहा है। यहां तक कि पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट भी हमारे पक्ष को जायज ठहरा चुका है। मालूम हो, पेशावर के आर्मी स्कूल में आतंकी हमले के बाद सरकार ने आतंकियों की फांसी की सजा पर लगी रोक हटाने का फैसला किया था। तब से अब तक कई आतंकियों को फांसी दी जा चुकी है।

जमात-उद-दावा का सरगना हाफिज सईद अब भी सक्रिय है और भारत पर हमले की धमकी देता रहता है। भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी होने के बाद भी सईद पडोसी मुल्‍क में खुले आम घूमता है। उसे कई बार भारत से सटी सीमा पर भी देखा गया है।