वॉशिंगटन। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अपॉर्च्युनिटी को 15 सालों की सेवा के बाद मृत घोषित कर दिया गया। छह पहियों वाले इस रोवर को साल 2004 में महज तीन महीने के लिए मंगल भेजा गया था, लेकिन यह लंबे समय तक सेवाएं देता रहा। अगला मार्स रोवर मिशन साल 2020 में किया जाना है।

पिछले साल जून में आए रेतीले तूफान के चलते अपॉर्च्युनिटी की ट्रांसमिशन क्षमता कमजोर हो गई थी। नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जिम ब्रिडेंस्टाइन ने ट्वीट कर बताया कि रोवर से संपर्क साधने के 800 से अधिक प्रयास किए गए। आखिरकार संपर्क नहीं होने पर इसे मृत घोषित कर दिया गया। सौर ऊर्जा से संचालित नासा का यह रोवर मंगल ग्रह पर सबसे ज्यादा चलने वाला रोवर था।

यह पिथले करीब आठ महीनों से शांत था। रोवर से संपर्क साधने में जुटे नासा के इंजीनियरों ने तूफान के चलते इसकी आंतरिक घड़ी में खराबी आने की आशंका जताई थी। मिशन के प्रोजेक्ट मैनेजर जॉन कल्लास ने कहा कि रोवर को गुडबाय कहना दुखद है। मगर, हमें यह भी याद रखना चाहिए कि यह 15 सालों का इन्क्रिडबल एडवेंचर है।

इस रोवर को मंगल की सतह पर एक किलोमीटर की यात्रा के लिए तैयार किया गया था। हालांकि, इसने रिकॉर्ड 45 किमी का सफर तय किया है। अपॉर्च्युनिटी और इसके लंबे समय पहले मृत हो चुके ट्विन रोवर स्पिरिट ने सबूत दिए हैं कि मंगल की सतह पर पानी के बहता था और यहां माइक्रोबियल लाइफ पनप सकती है।