वाशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने नई जानकारी जुटाई है, जिसके मुताबिक शनि के सबसे बड़े चांद टाइटन पर मीथेन की 100 मीटर से ज्यादा गहरी और छोटी झीलें हैं। NASA के कैसिनी अंतरिक्ष यान से जुटाए गए डाटा की मदद से वैज्ञानिकों को यह जानकारी मिली है। इस खोज को विज्ञान पत्रिका नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित किया गया है।

टाइटन हमारे सोलर सिस्टम में धरती के अलावा दूसरा ऐसा खगोलीय पिंड है जिसकी सतह पर तरल मिलने की पुष्टि हुई है। टाइटन पर भी पृथ्वी की तरह एक हाइड्रोलॉजिक चक्र चलता है। हालांकि अंतर यही है कि धरती पर यह चक्र पानी के साथ चलता है, जिसमें समुद्र से जल वाष्पीकृत होता है, बादल बनते हैं और फिर बारिश हो जाती है। टाइटन पर यह चक्र मीथेन और ईथेन के साथ पूरा होता है।

धरती पर आमतौर पर मीथेन और ईथेन जैसे हाइड्रोकार्बन को गैस माना जाता है। उच्च दबाव में किसी टैंक में भरने पर ही इन्हें तरल में बदलना संभव हो पाता है। वहीं टाइटन पर तापमान इतना कम है कि मीथेन और ईथेन जैसे हाइड्रोकार्बन वहां तरल रूप में ही रहते हैं।

पहले के डाटा से यह सामने आया था कि टाइटन के बड़े उत्तरी सागरों में मीथेन भरा है, लेकिन छोटी झीलों में भी ज्यादातर मीथेन का होना चौंकाने वाला है। इससे पहले कैसिनी ने टाइटन के दक्षिणी गोलार्ध में स्थित बड़ी झील ओंटारियो लेकस की स्टडी की थी। स्टडी में पाया गया था कि झील में मीथेन और ईथेन लगभग बराबर मात्रा में हैं। मीथेन की तुलना में ईथेन थोड़ा भारी होता है।

कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक मार्को मैस्ट्रोगिसेप ने कहा, 'हर खोज के साथ टाइटन का रहस्य और गहरा होता जाता है। हालांकि नए डाटा से हमें कई सवालों के जवाब खोजने में मदद मिलेगी। हम टाइटन के हाइड्रोलॉजी चक्र को और भी बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।'

अंतरिक्ष यान कैसिनी ने 2004 में शनि के सिस्टम में प्रवेश किया था। शनि के वातावरण में समा जाने के कारण 2017 में इसका सफर खत्म हो गया था। अपने अभियान के दौरान इसने टाइटन की सतह पर 16 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में फैली झीलों के डाटा जुटाए थे।