वाशिंगटन। शोध अनुसंधान कुछ हफ्तों में ही मिल जाएगी सफेद दाग से छुट्टी वैज्ञानिकों ने सफेद दाग यानी विटिलिगो के इलाज की ऐसी पद्धति विकसित की है जिसकी मदद से कुछ ही हफ्तों में इसे ठीक करना संभव होगा। सफेद दाग एक त्वचा रोग है, जिसमें त्वचा में रंग की वजह बनने वाली कोशिकाएं काम करना बंद कर देती हैं।

इसलिए शरीर पर सफेद चकत्ते पड़ जाते हैं। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स के शोधकर्ता जॉन हैरिस ने बताया कि अभी इसके इलाज में एक से दो साल का वक्त लग जाता है। कई बार इलाज रोकने के सालभर बाद फिर उसी जगह दाग दिखने लगते हैं। दोबारा उसी जगह दाग इसलिए बनते हैं, क्योंकि त्वचा की कोशिकाओं को यह याद रहता है कि पहले किस जगह पर दाग थे।

अब वैज्ञानिकों ने उन कोशिकाओं को पहचानने में सफलता पाई है, जो इस याद को संभालकर रखती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन कोशिकाओं को निष्क्रिय करने से सफेद दाग का इलाज जल्दी हो सकेगा और दोबारा इसे होने से भी ज्यादा समय तक रोका जा सकेगा।

दवाओं के निष्क्रिय घटक बन सकते हैं एलर्जी का कारण आप बीमारी के इलाज के लिए जो दवा खा रहे हैं, उसमें मिले हुए निष्क्रिय घटक एलर्जी का कारण भी बन सकते हैं। अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने यह बात कही है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि दवाओं का स्वाद, शेल्फ लाइफ और एब्जॉर्प्शन (अवशोषण) बढ़ाने के लिए उनमें कुछ निष्क्रिय घटक मिलाए जाते हैं। अध्ययन में पाया गया है कि 90 फीसद से ज्यादा दवाओं में कम से कम एक ऐसा घटक होता है, जो एलर्जी की वजह बन सकता है। इन घटकों में लैक्टोस, मूंगफली का तेल, ग्लूटेन और कृत्रिम रंग शामिल हैं।

शोधकर्ता डेनियल रेकर ने कहा कि आमतौर पर हर घटक इसी आधार पर चुना जाता है कि उसका किसी व्यक्ति पर सीधे कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन एलर्जी की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। इस शोध की प्रेरणा ऐसे ही मामले से मिली थी, जिसमें एक मरीज को दवा में मिले ग्लूटेन से एलर्जी हो गई थी।