स्ट्रासबर्ग। यूरोपीय संघ (ईयू) ने आतंकी फंडिंग और मनी लांड्रिंग से जुड़ी काली सूची में पाकिस्तान के बाद सऊदी अरब को भी डाल दिया है। इस सूची में अमेरिका के चार क्षेत्र भी शामिल किए गए हैं। ईयू आतंकी फंडिंग और मनी लांड्रिंग पर नियंत्रण में ढिलाई के कारण सूची में डाले गए देशों को खतरा मानता है। इस सूची में शामिल किए गए देशों की संख्या अब 23 हो गई है।

ईयू ने यह कदम यूरोपीय संघ के बैंकों में हुए कई घोटालों के बाद मनी लांड्रिंग पर की गई कार्रवाई के तहत उठाया है। सूची में शामिल किए गए देशों में आतंकी फंडिंग और मनी लांड्रिंग रोधी उपायों में रणनीतिक कमियां पाई गई हैं।

ईयू की न्याय आयुक्त वेरा जोरोवा ने बुधवार को यहां कहा, 'सूची पर मुहर लगाने के लिए यूरोपीय संघ के 28 देशों के पास एक माह का वक्त है। इस अवधि को बढ़ाकर दो माह तक किया जा सकता है। वे इस सूची को बहुमत के साथ खारिज भी कर सकते हैं, लेकिन मुझे इस बात का यकीन है कि वे इसे नहीं रोकेंगे। इसकी तत्काल जरूरत है, क्योंकि यह खतरा जंगल में लगी आग की तरह तेजी से बैंकिंग सेक्टर में फैलता जा रहा है।'

अमेरिका के चार क्षेत्र भी किए गए शामिल

ईयू की नई सूची में पनामा, लीबिया, बोत्सवाना, घाना, समोआ और बहामास के अलावा अमेरिका के चार क्षेत्र अमेरिकन समोआ, वर्जिन द्वीप, प्यूर्टो रिको और गुआम भी शामिल किए गए हैं।

सूची में पहले से हैं ये देश

सूची में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, उत्तर कोरिया, इथोपिया, ईरान, इराक, श्रीलंका, सीरिया, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, ट्यूनीशिया और यमन पहले से शामिल हैं। बोस्निया, गुयाना, लाओस, युगांडा और वनातू को सूची से हटा दिया गया है।

सऊदी सरकार ने जताया खेद

सऊदी अरब की सरकार ने सूची में शामिल किए जाने के फैसले पर खेद जताते हुए कहा कि सऊदी मनी लांड्रिंग और आतंकी फंडिंग से मुकाबले के लिए प्रतिबद्ध है।

अमेरिका और ब्रिटेन ने जताई नाराजगी

अमेरिका ने अपने चार क्षेत्रों को सूची में शामिल करने पर नाराजगी जाहिर की है। अमेरिकी कोषागार विभाग ने कहा कि सूची तैयार करने की प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण है। सूची की ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देशों ने भी आलोचना की है। ब्रिटेन ने सूची में शामिल किए गए देशों खासतौर पर सऊदी के साथ अपने आर्थिक संबंधों को लेकर चिंता जाहिर की है।